
समावेश’ ने सफलतापूर्वक पूरा किया‘IIM बेंगलुरु’ का इंक्यूबेशन कार्यक्रम
क्षमता-वृद्धि, संगठनात्मक विकास और परिणाम आधारित कार्य-ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर
पुणे विशाल सिंह : ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और स्थलांतरित युवाओं के लिए कार्यरत सामाजिक संस्था ‘समावेश’ ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बेंगलुरु के उद्यमिता सेल ‘NSRCEL’ द्वारा संचालित एक वर्ष का इंक्यूबेशन कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह कार्यक्रम संस्थाओं की क्षमता-वृद्धि, संगठनात्मक विकास तथा प्रभाव मापने के लिए परिणामाधारित फ्रेमवर्क तैयार करने पर केंद्रित था। इस इंक्यूबेशन से संस्था के कार्य की पहुंच और प्रभाव में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की अपेक्षा है।
आवश्यक कागजातों की पूर्ति, शैक्षणिक छात्रवृत्तियां और उच्च शिक्षा में प्रवेश इन तीन प्रमुख मुद्दों पर संस्था की कार्ययोजना आधारित है। वर्ष 2024–25 में ‘समावेश’ ने 1130 से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मार्गदर्शन, 2500 से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति प्राप्त करने में सहायता, तथा 500 से अधिक युवाओं को जरूरी दस्तावेज तैयार करने में समर्थन दिया। ग्रामीण पृष्ठभूमि के अनेक विद्यार्थियों को विदेश विश्वविद्यालयों में छात्रवृत्ति के साथ प्रवेश पाने के लिए भी मार्गदर्शन किया गया। इन्हीं उल्लेखनीय कार्यों को ध्यान में रखते हुए NSRCEL द्वारा ‘समावेश’ को इंक्यूबेशन के लिए चयनित किया गया।
इस अवसर पर ‘समावेश’ के संस्थापक एडवोकेट प्रवीण निकम ने बताया कि, “सामाजिक मुद्दों पर काम करने वाली हमारी संस्था को IIM बेंगलुरु के इस कार्यक्रम से नई मजबूती और दिशा मिली है। 12 महीनों के दौरान हमें संगठन की संरचना, गतिविधियों का विस्तार, प्रभाव बढ़ाने की रणनीति और कार्य-ढांचा विकसित करने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण मिला। देशभर से मूलभूत सामाजिक विषयों पर काम करने वाली आठ संस्थाओं का इस इंक्यूबेशन के लिए चयन हुआ था, जिनमें ‘समावेश’ भी शामिल था।”
उन्होंने कहा कि IIM का अनुभव और मार्गदर्शन आगे संस्था के काम को और अधिक प्रभावी बनाएगा तथा टीम को अधिक सजगता और जागरूकता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।
‘समावेश’ की स्थापना के बारे में निकम ने बताया कि, “2011 में पुणे में उच्च शिक्षा के लिए आए कुछ ग्रामीण युवाओं ने अपने जैसे हजारों विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर यह पहल शुरू की थी। उच्च शिक्षा की राह में अवसरों की जानकारी, छात्रवृत्तियों की प्रक्रिया, प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी और आवश्यक दस्तावेजों की कमी जैसी चुनौतियाँ लगातार सामने आती थीं। इसी का समाधान करने के लिए ‘समावेश’ तीन प्रमुख पहलों के माध्यम से कार्य करता है।”
एड. निकम के अनुसार संस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और स्थलांतरित युवा सिर्फ आर्थिक या जानकारी की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर विश्वविद्यालयों से वंचित न रहें।



