
आचार्य रतनलाल सोनग्रा राष्ट्रसंत गाडगे महाराज स्मृति पुरस्कार से सम्मानित
गाडगे महाराज का संतत्व क्रांतिकारी – डॉ. श्रीपाल सबनीस
पुणे : फुले–शाहू–आंबेडकर विचार मंच की ओर से वर्ष 2025 का राष्ट्रसंत गाडगे महाराज स्मृति पुरस्कार गाडगे महाराज के सहयोगी एवं वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य रतनलाल सोनग्रा को प्रदान किया गया। यह सम्मान अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्रीपाल सबनीस के करकमलों द्वारा गरिमामय वातावरण में प्रदान किया गया।
पुरस्कार स्वरूप भारतीय संविधान की प्रति, सम्मान–चिन्ह, लेखनी (पेन) तथा तिरंगी शाल प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता बहुजन समाज पार्टी के नेता डॉ. हुलगेश चलवादी ने की, जबकि मंच पर पूर्व नगरसेविका लताताई राजगुरू प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. श्रीपाल सबनीस ने कहा कि संत गाडगे महाराज ने हाथ में झाड़ू लेकर न केवल गाँव की सड़कें साफ कीं, बल्कि समाज की मानसिकता को भी शुद्ध किया। उन्होंने अंधविश्वास और जातिवाद का विरोध करते हुए समाज को प्रबोधन का मार्ग दिखाया। इसी कारण गाडगे महाराज संत होने के साथ-साथ महान समाज सुधारक भी थे। यह उनकी सांस्कृतिक पुण्याई है, जिससे उनका संतत्व क्रांतिकारी स्वरूप उजागर होता है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में सुशीलाताई सोनग्रा, भगवान वैराट, के. एच. सूर्यवंशी, भगवान धेंडे, जी. एस. कोलते, आरतीताई सोनग्रा, गोयलताई, ज़ेन मास्टर सुदस्सन, भंते हर्षवर्धन, भालचंद्र गव्हाणे, इम्तियान पठान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन विठ्ठल गायकवाड ने किया।


