पूणे

तेंदुए के हमले में गर्दन की नस को चोट लगे लड़के पर पुणे के केईएम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने की कॅरोटिड स्टेंटिंग सर्जरी

तेंदुए के हमले में गर्दन की नस को चोट लगे लड़के पर पुणे के केईएम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने की कॅरोटिड स्टेंटिंग सर्जरी

 

पुणे : पुणे के केईएम हॉस्पिटल में डॉ.आनंद आलुरकर के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने एक 8 साल के लड़के की कॅरोटिड स्टेंटिंग सर्जरी सफलतापूर्वक की. इस लड़के की गर्दन की नसें तेंदुए के हमले में घायल हो गई थीं. इस प्रक्रिया ने आर्टरी में छेद के कारण हुई रुकावट को ठीक किया. अगर इलाज न किया जाता, तो हालत जानलेवा हो सकती थी.

 

अहिल्यानगर ज़िले के एक गाँव में रहने वाले एक किसान परिवार के लिए दिसंबर का एक दिन बिल्कुल सामान्य था. लेकिन अचानक एक तेंदुए ने उनके आठ साल के बेटे पर हमला कर दिया. तेंदुआ बच्चे की गर्दन पकड़कर उसे उठाकर ले जाने लगा ,तभी बच्चे के पिता तुरंत अपनी टू व्हीलर गाड़ी पर तेंदुए के पीछे-पीछे गए और लगातार हॉर्न बजाने लगे. सौभाग्य से तेंदुए ने बच्चे को छोड़ दिया और भाग गया. इसके बाद परिवार के लोगों ने बच्चे को तुरंत स्थानिक अस्पताल में भर्ती कराया. वहाँ प्राथमिक उपचार देने के बाद आगे के इलाज के लिए उसे पुणे के केईएम हॉस्पिटल में लाया गया.

 

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए पुणे के केईएम हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ.आनंद आलुरकर ने बताया कि तेंदुए के हमले के कारण बच्चे की गर्दन में गंभीर चोट आई थी और मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली एक आर्टरी फट गई थी. उस स्थान पर एक उभार बन गया था. इस स्थिति को स्यूडो एन्यूरिज़्म कहा जाता है, जिसमें धमनी की दीवार कमजोर होकर फूल जाती है. इससे धमनी के फटने और जानलेवा रक्तस्राव का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है.

 

इस स्थिति का निदान डिजिटल सब्ट्रॅक्शन अँजिओग्राफी (डीएसए) जांच के माध्यम से किया गया. डीएसए यह कैथ लैब में की जाने वाली मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं की एक प्रगत अँजिओग्राफी है.

 

हमने कॅरोटिड स्टेंटिंग करने का निर्णय लिया. यह मस्तिष्क की धमनियों से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए की जाने वाली बिना टांके की सर्जरी है.यह प्रक्रिया जांघ की धमनी के माध्यम से की जाती है. स्टेंटिंग के दौरान ‘कवर्ड स्टेंट ग्राफ्ट’ का उपयोग करके धमनी के छेद को बंद किया गया. बच्चे को केवल दो दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज दिया गया.

 

डॉ. आनंद आलुरकर ने बताया कि, केईएम हॉस्पिटल,पुणे में पिछले दो दशकों से स्ट्रोक (पक्षाघात) से पीड़ित वयस्कर मरीजों में ग्रीवा धमनी (कॅरोटिड आर्टरी) में रुकावट दूर करने के लिए कॅरोटिड स्टेंटिंग प्रक्रिया की जा रही है. लेकिन मरीज की कम उम्र, गर्दन में हुई गंभीर चोट और उसकी असामान्य परिस्थितियों के कारण यह स्थिति वैद्यकीय दृष्टि से दुर्लभ और उल्लेखनीय सफलताओं में से एक है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button