पूणे

बालकों के समग्र विकास के लिए पंचसूत्र-डॉ. विष्णु माने का मत, शिवणे में अवर ‘मिनी गुरूकुल’ का शुभारंभ

बालकों के समग्र विकास के लिए पंचसूत्रडॉ. विष्णु माने का मत, शिवणे में अवर ‘मिनी गुरूकुल’ का शुभारंभ

पुणे, विशाल सिंह: “शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं तकनीकी शैक्षणिक व्यवस्थापन के माध्यम से ही बालकों का समग्र विकास संभव है।” यह मत सुप्रसिद्ध गर्भसंस्कार कोच डॉ. विष्णु माने ने व्यक्त किया।

राष्ट्रमाता जिजाऊ और युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर गीताई ह्युमनकाइंड डेवलपमेंट ट्रस्ट, पुणे की ओर से आयोजित ‘संस्कार-संवाद उत्सव’ में डॉ. विष्णु माने प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इसी अवसर पर अवर ‘मिनी गुरूकुल’ (Our Mini Gurukul) का शुभारंभ अतिथियों द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय योग गुरु, लेखक एवं शोधक डॉ. संप्रसाद विनोद, भारतीय कृषि पर्यटन के जनक पांडुरंग तावरे, तथा प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के विशेषज्ञ पुंडलिक वाघ सन्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अध्यक्षस्थली पर कर्मयोगी बाबाराव जोगदंड कृषि महाविद्यालय के अध्यक्ष माणिकराव बाबाराव जोगदंड थे।

इस अवसर पर रामालेक्स ग्रुप के संचालक राम जोगदंड, गीताई के विश्वस्त डॉ. संतोष जोगदंड, विश्वस्त मनोरमा जोगदंड और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अविनाश जोगदंड भी उपस्थित थे।

डॉ. विष्णु माने ने कहा, “पुरुषों के समान काम कर रही महिलाओं को आज मातृत्व की जानकारी का अभाव है। यदि महिलाओं को गर्भसंस्कार दिया जाए तो आने वाली पीढ़ी संस्कारी, बुद्धिमान और होशियार होगी। नियोजित और गर्भसंस्कारीत बच्चों के जन्म से समाज सुदृढ़ बनेगा। आज गीताई ओएमजी के माध्यम से कौशल शिक्षा, संस्कृति और संस्कार का कार्य किया जाएगा।”

डॉ. संप्रसाद विनोद ने कहा, “शिक्षा सतत सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें जीवनभर हम सीखते रहते हैं। वर्तमान समय में केवल शिक्षा दी जा रही है, लेकिन कैसे सीखना है इसका प्रशिक्षण नहीं मिल रहा। व्यक्ति अनुभव के आधार पर सीखता है, इसलिए बालकों की नींव मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। स्वामी विवेकानंद ने आत्मविश्वास और अस्तित्व की पहचान कराई, उसी प्रकार ज्ञान बच्चों को दिया जाना चाहिए।”

अविनाश जोगदंड ने कहा, “मूल्य आधारित व्यक्तित्व विकास, राष्ट्रीय एवं सामाजिक जागरूकता, लोकतंत्र को सुदृढ़ करना, नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य, देशभक्ति का संज्ञान — यही इस गुरूकुल के उद्देश्य हैं। इसके साथ ही बालकों के समग्र विकास के लिए शिक्षा, संस्कार, अनुभव और संवाद का संतुलित समन्वय करने वाली मुक्त, लचीली और आनंददायी गुरूकुल प्रणाली स्थापित की गई है।”

 

पांडुरंग तावरे और पुंडलिक वाघ ने अपने भाषण में कहा कि आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण संस्कार और शिक्षा के माध्यम से होता है, इसलिए गुरूकुल शिक्षा पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में युवाओं को कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित करना आवश्यक है।

गीताई ह्युमनकाइंड डेवलपमेंट ट्रस्ट, पुणे

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