
मूट कोर्ट से विद्यार्थियों में तर्क-वितर्क और न्यायालयीन कौशल विकसित होते हैं
न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव का मत; आईएलएस लॉ कॉलेज में अप्रत्यक्ष कर पर तीसरी राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समापन
पुणे, विशाल सिंह
मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों की तर्क-वितर्क क्षमता, कानूनी शोध और न्यायालयीन प्रक्रिया की समझ विकसित होती है। इससे भविष्य में कुशल वकील और कर विशेषज्ञ तैयार होते हैं। कॉलेज स्तर पर ऐसी प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन होना चाहिए, ऐसा मत मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने व्यक्त किया।
इंडियन लॉ सोसाइटी (आईएलएस) और चेंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स (सीटीसी) के संयुक्त तत्वावधान में आईएलएस लॉ कॉलेज में अप्रत्यक्ष करों पर आधारित तीसरी राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता की अंतिम फेरी हाल ही में उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। अप्रत्यक्ष कर कानून पर आधारित यह देश की एकमात्र राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता मानी जाती है। इस अवसर पर आईएलएस लॉ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. दीपा पातुरकर, प्राध्यापिका डॉ. दिव्या मित्तल, सीटीसी के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता अजय सिंह तथा छात्र समिति की अध्यक्ष सीए नम्रता देढिया उपस्थित थीं।
दिसंबर-जनवरी में आयोजित प्रारंभिक, प्री-क्वार्टर और सेमीफाइनल चरणों के बाद दो टीमों ने फाइनल में प्रवेश किया। दोनों टीमों ने न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीकांत कुलकर्णी की पीठ के समक्ष प्रभावशाली ढंग से अपने तर्क प्रस्तुत किए। युक्तिवाद में प्री-जीएसटी उत्पाद शुल्क आदेशों के क्रियान्वयन, कर वर्गीकरण और अधिकार क्षेत्र से जुड़े जटिल कानूनी मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रतियोगिता में रायपुर स्थित हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू) की माही अग्रवाल, अनन्या मिश्रा और अंबाती नुपूरराव की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए 15 हजार रुपये का पुरस्कार जीता। भोपाल की नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) की साहिल यादव, हिया सक्सेना और प्रियम सोनी की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर 10 हजार रुपये का पुरस्कार हासिल किया।
पांच हजार रुपये का सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल पुरस्कार पुणे के सिम्बायोसिस लॉ कॉलेज (मन्नत कौर सोधी, शश्वत शिवम और स्नेहा गुप्ता) को प्रदान किया गया। सर्वश्रेष्ठ वक्ता पुरस्कार तमिलनाडु के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के हरिरूपन माथन और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की सिमर घुमन को मिला।
इस प्रतियोगिता में अहमदाबाद, भुवनेश्वर, भोपाल, बेंगलुरु, चेन्नई, गांधीनगर, गोवा, हैदराबाद, पुणे, रायपुर, छत्रपति संभाजीनगर, तिरुचिरापल्ली और त्रिपुरा सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालयों के कुल 16 दलों ने भाग लिया। प्रारंभिक और सेमीफाइनल चरणों का मूल्यांकन सीए नरेश शेट्टी, सीए राजीव लुथिया, अधिवक्ता अनिल बलानी और अधिवक्ता के. एस. नवीनकुमार ने किया। प्रतियोगिता का आयोजन सीए नम्रता देढिया, सीए चार्मी शाह, सीए मानसी नगडा, प्राध्यापिका डॉ. दिव्या मित्तल और प्राध्यापिका भूमिका राठोड ने किया।
विजेता टीम इस प्रकार है :विधि महाविद्यालय रोड: न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव, श्रीकांत कुलकर्णी, डॉ. दीपा पातुरकर सहित अन्य मान्यवरों के साथ विजेता टीम।



