
शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं,बल्कि एक अच्छा इंसान बनाना होना चाहिए:– राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर
– फ्यूएल संस्था का द्वितीय दीक्षांत समारोह संपन्न
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: शिक्षा का उद्देश्य केवल एक अच्छी नौकरी पाना, बड़ा पैकेज हासिल करना और आर्थिक रूप से समृद्ध होना ही नहीं होना चाहिए। शिक्षा से प्राप्त ज्ञान का उपयोग समाज की उन्नति और ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए भी किया जाना चाहिए। अपने पैरों पर खड़े होते समय दूसरों के लिए भी कुछ करने की भावना विद्यार्थियों में विकसित होना आवश्यक है, यह बात तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने कही।
‘फ्रेंड्स यूनियन फॉर एनर्जाइजिंग लाइव्स’ (फ्यूएल) संस्था के 20वें स्थापना दिवस और द्वितीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों के हाथों प्रबंधन बैच २०२४-२६ के विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न सीएसआर समर्थित प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों के छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसी मंच से ‘फ्यूएल स्किलटेक यूनिवर्सिटी, पुणे’ इस नए विश्वविद्यालय के उद्घाटन की औपचारिक घोषणा भी की गई।
इस अवसर पर स्किलटेक एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (फ्यूएल) की कुलाधिपति डॉ. सुलभा देशपांडे, फ्यूएल के अध्यक्ष एवं कुलपति केतन देशपांडे, बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गणेश मोहन, एसबीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी प्रत्युष मेहरोत्रा, विधायक राणा जगजीतसिंह पाटिल, प्रो. मयूरी देशपांडे और ऑलकार्गो ग्रुप के अध्यक्ष शशी किरण शेट्टी उपस्थित थे।
राजेंद्र आर्लेकर ने कहा कि विद्यार्थियों के हाथों में डिग्रियां, डिप्लोमा और विभिन्न प्रमाणपत्र हैं। लेकिन, इस योग्यता का उपयोग वास्तविक कार्य में कैसे किया जाएगा और समाज की समस्याओं को हल करने में विद्यार्थी क्या योगदान देंगे, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। केवल भाषण सुनने के बजाय उसमें व्यक्त विचारों को अमल में लाना ज़रूरी है, ऐसा उन्होंने रेखांकित किया। इसके साथ ही, अपने शैक्षणिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए आर्लेकर ने कहा कि मेरिट लिस्ट में स्थान पाने वाले विद्यार्थियों द्वारा अच्छे अंक, आर्थिक समृद्धि, बंगला और महंगी गाड़ियां हासिल कर लेना ही क्या शिक्षा की सफलता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के माध्यम से एक अच्छा इंसान बनाने को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।

फ्यूएल मॉडल शिक्षा का एक अनोखा दृष्टिकोण है, जो शैक्षणिक अध्ययन, व्यावहारिक कौशल विकास, उद्योग जगत के साथ सहयोग और उद्यमिता का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है। युवाओं को व्यावसायिक दुनिया के लिए तैयार करने की दिशा में फ्यूएल जो कार्य कर रहा है, वह एक बेहतरीन उदाहरण है। शैक्षणिक संस्थानों और देश के प्रत्येक राज्य को इस पर विचार करना चाहिए और अपनी स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार इसे अपनाना चाहिए, ऐसा आर्लेकर ने कहा।
डॉ. केतन देशपांडे ने बताया कि फ्यूएल की स्थापना के २० वर्ष पूरे हो चुके हैं और युवाओं को कौशलाधारित शिक्षा व रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने पर संस्था ने हमेशा ज़ोर दिया है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के मार्गदर्शन से संस्था के कार्यों को सही दिशा मिली। २०२२-२६ बैच के ८० प्रतिशत विद्यार्थियों को रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए हैं। इन विद्यार्थियों का वेतन उनके परिवार की वार्षिक आय से दोगुना हो गया है। उद्योग समूहों के सहयोग से डेटा साइंस और फाइनेंस सहित विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार किया जाएगा और उद्योगों से सीधे जुड़ी शिक्षा ही इस संस्थान की मुख्य विशेषता है।
गणेश मोहन ने कहा कि तकनीक के कारण नौकरियां खत्म नहीं होतीं, बल्कि काम की गति बढ़कर रोज़गार के नए अवसर पैदा होते हैं। बदलती तकनीक के अनुसार उत्पादन प्रणाली और उद्योगों का स्वरूप बदलता है। विद्यार्थियों को दूसरों के हित में काम चुनना चाहिए, अधिकार मिलने से पहले नेतृत्व के गुण विकसित करने चाहिए और तकनीक के इस युग में मानवीय संबंधों को सहेज कर रखना चाहिए।
शशी किरण शेट्टी ने कहा कि ‘स्कूल ऑफ लॉजिस्टिक्स’ की स्थापना करने, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत करने तथा युवाओं के लिए अधिक अवसर पैदा करने के उद्देश्य से वे ‘फ्यूएल’ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की इच्छा रखते हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्राची आहेरराव ने किया तथा प्रो. मयूरी देशपांडे ने आभार व्यक्त किया।

केवल डिग्रियों और नौकरियों पर ध्यान केंद्रित करने वाली शिक्षा प्रणाली से परे जाने की आवश्यकता है। युवाओं में ऐसे कौशल, आत्मविश्वास और उद्यमी दृष्टिकोण विकसित करने को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, जिससे वे दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर सकें। हमारा लक्ष्य केवल ‘नौकरी खोजने वाले’ नहीं, बल्कि ‘नौकरी देने वाले’ तैयार करना होना चाहिए। शिक्षा, व्यावहारिक कौशल और उद्यमिता का सही तालमेल बिठाकर फ्यूएल यह दिखा रहा है कि हम अपने युवाओं को आत्मनिर्भर कैसे बना सकते हैं और उन्हें समाज व राष्ट्र की प्रगति में अर्थपूर्ण योगदान देने के लिए कैसे सक्षम बना सकते हैं।


