
ज्योतिष वास्तु विश्व अनुसंधान केंद्र का पंचम दीक्षांत एवं पुरस्कार वितरण समारोह 1 फरवरी को
स्व. डॉ. धुंडीराज पाठक गुरुजी की स्मृति में विशेष सम्मान समारोह; शारदा व रत्नमाला सहित विभिन्न पुरस्कारों का वितरण
पुणे विशाल समाचार:ज्योतिष वास्तु विश्व अनुसंधान केंद्र, पुणे की ओर से पंचम दीक्षांत समारोह एवं भव्य पुरस्कार वितरण कार्यक्रम रविवार, 1 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया है। इसी दिन वास्तुशास्त्र के गुरु स्वर्गीय डॉ. धुंडीराज पाठक गुरुजी की स्मृति में विशेष श्रद्धांजलि एवं स्मरण कार्यक्रम भी संपन्न होगा। यह जानकारी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष वेदमूर्ति उमेश कुलकर्णी गुरुजी ने एक पत्रकार परिषद में दी।
यह कार्यक्रम पद्मावती क्षेत्र स्थित विणकर सभागृह में प्रातः 9 बजे से सायं 4 बजे तक आयोजित किया जाएगा। पत्रकार परिषद में संस्था की संपर्क प्रमुख अधिवक्ता श्रुति योगेश पिसे तथा संस्था के हितचिंतक एवं सलाहकार प्रसाद शामसुंदर शिरोडकर भी उपस्थित थे।
मुख्य दीक्षांत प्रमाणपत्र वितरण समारोह प्रातः 10 बजे होगा। इस अवसर पर वास्तुविशारद, अंकशास्त्र विशेषज्ञ, वास्तु भूषण, वास्तु रत्न तथा वैदिक टैरो रीडर जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को दीक्षांत प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। महाराष्ट्र सहित देश-विदेश से आए लगभग 150 विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र एवं पारितोषिक देकर सम्मानित किया जाएगा।
वेदमूर्ति उमेश कुलकर्णी गुरुजी ने बताया कि यह समारोह उनके गुरु स्व. डॉ. धुंडीराज पाठक गुरुजी के स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है। उनके वास्तुशास्त्र क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
इस अवसर पर लंदन से जितेंद्र ओमप्रकाश भट्टड विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे, जो केवल इस कार्यक्रम के लिए भारत आ रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन हैदराबाद के वरिष्ठ ज्योतिर्विद भाऊसाहेब रंगनाथ कुलकर्णी के शुभहस्ते संपन्न होगा।
प्रातः 10 बजे विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों का वितरण रत्नमाला रमेश कुलकर्णी के करकमलों से किया जाएगा। इसमें वरिष्ठ वास्तु विशेषज्ञ डॉ. दिलीप नेमीचंद नाहर को रत्नमाला पुरस्कार, वरिष्ठ वास्तु गुरु नरेंद्र सहस्त्रबुद्धे को उनके उल्लेखनीय लेखन हेतु शारदा पुरस्कार, वीरवाड़ी (नसरापूर) स्थित अम्नाय वाटिका वेद पाठशाला के संस्थापक वेदमूर्ति घनपाठी गोपाल भुजंग जोशी गुरुजी को वेद संवर्धन प्रेरणा पुरस्कार तथा वेदमूर्ति वैभव कुलकर्णी गुरुजी को वेदमार्ग दीपस्तंभ पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
दोपहर के सत्र में वरिष्ठ ज्योतिर्विद एवं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य वि. श. अष्टेकर गुरुजी को ज्योतिष रत्नकार – गुरु कृतज्ञता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
स्व. डॉ. धुंडीराज पाठक गुरुजी की स्मृति में उनके कार्यों पर आधारित मनोगत, स्मृतिचर्चा एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया है। शिष्यवर्ग द्वारा उनके योगदान का स्मरण करते हुए वास्तुशास्त्र की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया जाएगा।
कार्यक्रम की विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष वास्तु स्थलों पर ले जाकर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिससे उन्हें भविष्य में वास्तु डिजाइन एवं परीक्षण में प्रत्यक्ष अनुभव का लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के समापन सत्र में विद्यार्थी मनोगत, वास्तु प्रात्यक्षिक भ्रमण तथा अनुभव कथन का आयोजन किया जाएगा।

