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वीडियो को AI बताने पर उठे गंभीर सवाल, बिना तकनीकी जांच कैसे तय किया गया नैरेटिव?

🔴 वीडियो को AI बताने पर उठे गंभीर सवाल, बिना तकनीकी जांच कैसे तय किया गया नैरेटिव?

डीपीआरओ कार्यालय, शिकायतें, महिला कर्मी और वित्तीय पारदर्शिता तक पहुंचा मामला

विशाल समाचार | इटावा

इटावा जनपद में हाल ही में सामने आए एक वीडियो को लेकर प्रशासनिक और मीडिया स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो को कुछ माध्यमों द्वारा AI जनरेटेड बताकर प्रसारित किया गया, जबकि वीडियो की बनावट, एंगल और ऑडियो संरचना को देखकर कई जानकार इसे मोबाइल फोन को ऊपर की जेब में रखकर रिकॉर्ड किया गया ओरिजनल वीडियो मान रहे हैं।

मोबाइल रिकॉर्डिंग का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले लोगों का कहना है कि इस तरह की रिकॉर्डिंग पहले भी सामान्य रूप से की जाती रही है। वीडियो में न तो चेहरे या फ्रेम में किसी प्रकार की डिजिटल विकृति दिखाई देती है और न ही आवाज़ में मशीन जनित पैटर्न, जो सामान्यतः AI या डीपफेक वीडियो में पाए जाते हैं। इसके बावजूद बिना किसी डिजिटल फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के वीडियो को AI करार दिया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस पूरे मामले में डीपीआरओ कार्यालय, इटावा की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। जिला सूचना अधिकारी वनवासी सिंह, जिनका कार्यालय जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, इटावा है, को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि विवाद के बीच एक स्थानीय अख़बार के माध्यम से सफाई प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, जबकि इस संबंध में अब तक न तो कोई आधिकारिक लिखित प्रेस नोट जारी किया गया और न ही कोई तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, जुलाई माह से दर्ज की जा रही शिकायतों में शिकायतकर्ता से प्रत्यक्ष संपर्क नहीं किया गया। वहीं सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को लेकर भी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

इसी डीपीआरओ कार्यालय के अंतर्गत कार्यरत एक महिला कर्मी द्वारा चैनल और कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने, बार-बार राजीनामा लिए जाने और अंततः सेवा समाप्त किए जाने का मामला भी सामने आया है। इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत या लिखित स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

फोटो और वीडियो के तकनीकी सत्यापन को लेकर भी विवाद बना हुआ है। जिस फोटो पर “AI वीडियो” जैसा कथन अंकित किया गया, उसके समर्थन में किसी भी प्रकार का तकनीकी प्रमाण या सत्यापन दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में फोटो और वीडियो की स्वतंत्र डिजिटल फॉरेंसिक जांच अनिवार्य होती है।

स्थानीय स्तर पर अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि—

वीडियो और फोटो की स्वतंत्र डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जाए

पूरे प्रकरण से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं की वित्तीय एवं टैक्स संबंधी पारदर्शिता की जांच हो

बिना तकनीकी प्रमाण किसी सामग्री को “AI वीडियो” घोषित करने की प्रक्रिया की जवाबदेही तय की जाए

इस संबंध में डीपीआरओ कार्यालय, जिला प्रशासन, सूचना विभाग तथा शिकायतकर्ता पक्ष सभी से जवाब मांगा गया है। समाचार लिखे जाने तक किसी भी पक्ष द्वारा कोई तकनीकी रिपोर्ट, लिखित बयान या आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

जवाब प्राप्त होने पर उसे उसी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

तथ्यों पर सवाल, जवाबदेही की मांग

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