
बार्टी का कार्य सराहनीय – एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष आनंदराव अडसूळ
रिपोर्ट: विशाल समाचार संवाददाता
स्थान:पुणे,महाराष्ट्र में
पुणे: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था (बार्टी) द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्य अत्यंत प्रशंसनीय हैं तथा संस्था सही दिशा में अग्रसर है। यह प्रतिपादन अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष आनंदराव अडसूळ ने बार्टी मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान किया।
बैठक में बार्टी के महासंचालक सुनील वारे ने संस्था द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं उपक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर निबंधक विशाल लोंढे, विभागप्रमुख रविंद्र कदम, डॉ. बबन जोगदंड, लेखाधिकारी नितीन चव्हाण, प्रज्ञा मोहिते, सुमेध थोरात, डॉ. सारिका थोरात, महेश गवई, आरती जाधव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
संविधान के कारण मिला सम्मानजनक जीवन
अडसूळ ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि देश के प्रजासत्ताक बनने के समय यह विचार चल रहा था कि देश का संचालन किस प्रकार किया जाए। उस समय 40 करोड़ की आबादी वाले देश में संविधान निर्माण के लिए कोई विद्वान उपलब्ध नहीं था। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपनी प्रतिभा और उच्च शिक्षा के बल पर विश्व की विभिन्न संविधानों का अध्ययन कर भारत को एक सशक्त संविधान प्रदान किया। वे विधि विशेषज्ञ, बैरिस्टर और प्राध्यापक थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर द्वारा प्रदत्त संविधान के कारण ही आज एक सामान्य व्यक्ति भी सांसद या अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग का अध्यक्ष बन सकता है। यदि बाबासाहेब का जन्म न हुआ होता, तो समाज के वंचित वर्गों की स्थिति क्या होती, इसकी कल्पना भी कठिन है। आज हम जो सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, वह उनके योगदान का परिणाम है।
कार्यक्रम की शुरुआत में अडसूळ ने भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। महासंचालक सुनील वारे ने उन्हें डॉ. आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमा एवं ‘महामानव’ ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया।
योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश
समीक्षा बैठक में अडसूळ ने निर्देश दिए कि बार्टी की विभिन्न योजनाएं अनुसूचित जाति वर्ग के वंचित एवं जरूरतमंद लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में अधिकाधिक युवाओं को अवसर मिले तथा उन्हें उद्यमिता और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए संस्था को और सक्रिय प्रयास करने चाहिए।
महासंचालक सुनील वारे ने बताया कि बार्टी की स्थापना अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान हेतु की गई है। संस्था के माध्यम से अनेक विद्यार्थी भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राज्य सेवाओं में अधिकारी बने हैं। कई शोधार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान कर बार्टी का नाम गौरवान्वित किया है। साथ ही युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा संविधान एवं डॉ. आंबेडकर सहित अन्य महापुरुषों के साहित्य को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने का कार्य भी संस्था द्वारा किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन नितीन सहारे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. बबन जोगदंड ने किया।



