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मंगलवार को प्रकाशित ‘आठ महीने दबा सच, अब बेनकाब होता सिस्टम’ शीर्षक खबर के बाद संबंधित विभागों में हलचल देखी जा रही है। लंबे समय से लंबित शिकायतों और दस्तावेजों को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, हालांकि आधिकारिक कार्रवाई को लेकर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

आठ महीने तक दबाई गई शिकायतें, वायरल वीडियो के बाद खुली सिस्टम की परतें — प्रशासनिक चुप्पी, संभावित संरक्षण और निर्यात नीति तक उठे गंभीर सवाल

मंगलवार को प्रकाशित ‘आठ महीने दबा सच, अब बेनकाब होता सिस्टम’ शीर्षक खबर के बाद संबंधित विभागों में हलचल देखी जा रही है। लंबे समय से लंबित शिकायतों और दस्तावेजों को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, हालांकि आधिकारिक कार्रवाई को लेकर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

आठ महीने तक दबाई गई शिकायतें, वायरल वीडियो के बाद खुली सिस्टम की परतें — प्रशासनिक चुप्पी, संभावित संरक्षण और निर्यात नीति तक उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट: देवेन्द्र सिंह तोमर

स्थान: इटावा, उत्तर प्रदेश

इटावा में पिछले आठ महीनों से लगातार की जा रही शिकायतों पर कार्रवाई न होना अब केवल एक प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार पर सीधा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता द्वारा संबंधित विभागों से लेकर लखनऊ स्तर तक प्रमाण, आयकर रिटर्न (ITR) तथा अन्य दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाने के बावजूद जांच प्रक्रिया का शुरू न होना यह संकेत देता है कि मामला केवल फाइलों की धीमी गति का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से दबाए जाने का हो सकता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जून 2025 से लेकर आज तक — पूरे आठ महीनों की अवधि में — जिला प्रशासन की ओर से शिकायतकर्ता को एक बार भी संपर्क नहीं किया गया।

न तो किसी अधिकारी द्वारा फोन कॉल किया गया,

न ही स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया,

और न ही जांच के संदर्भ में कोई औपचारिक संवाद स्थापित किया गया।

जबकि शिकायतों के साथ आवश्यक दस्तावेज़, प्रमाण और आयकर रिटर्न तक उपलब्ध कराए जा चुके थे।

सूत्रों का यह भी दावा है कि जिस डीपीआरओ के खिलाफ जांच प्रस्तावित है, उनका कार्यकाल आगामी कुछ ही महीनों में पूरा होने जा रहा है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि प्रशासनिक स्तर पर जांच प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है, ताकि अधिकारी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मामला स्वतः ठंडे बस्ते में चला जाए।

इसके अतिरिक्त, सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि संबंधित डीपीआरओ के समधी उसी लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान में सांसद हैं। इसी संभावित पारिवारिक–राजनीतिक संबंध के चलते जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि प्रभाव और संबंधों के चलते ही शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।

इसी बीच बीफ एक्सपोर्ट इंडस्ट्री, टैक्स सिस्टम और सरकार की निर्यात नीति को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और मीट व्यापार के टैक्स ढांचे की तुलना करते हुए जीएसटी दरों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वीडियो में यह दावा भी किया गया है कि इस इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों द्वारा राजनीतिक दलों को आर्थिक सहयोग दिया जाता है, जिससे नीति निर्माण पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

खुलासे के बाद क्या बदला?

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सांसद प्रो. एस.पी. सिंह कठेरिया द्वारा भेजे गए पत्र के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज होने की जानकारी सामने आई। हालांकि शिकायतें और दस्तावेज पहले से ही संबंधित विभागों के पास मौजूद थे, जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता रहा।

वेबसाइट द्वारा मंगलवार को उठाए गए सवालों के बाद अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

अब यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है कि

▶ क्या बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के इस मामले में कोई सुनवाई संभव थी?

▶ क्या आम नागरिक की शिकायतें तब तक फाइलों में दबाकर रखी जाती हैं, जब तक कोई प्रभावशाली हस्तक्षेप न हो?

▶ जब शिकायतकर्ता को आठ महीनों में एक फोन तक न किया जाए, तो जांच की प्रक्रिया आखिर किस स्तर पर चल रही थी?

▶ और क्या संभावित पारिवारिक–राजनीतिक संबंध जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं?

आज जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुका है, तो यह याद रखना आवश्यक है कि

👉 शिकायतें आज नहीं दी गईं,

👉 सबूत आज नहीं जुटाए गए,

👉 और आवाज भी अचानक नहीं उठी।

यह सब पिछले आठ महीनों से प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत था।

अब पूरे इटावा सहित प्रदेश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि

क्या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच होगी,

क्या संभावित संबंधों की सच्चाई सामने आएगी,

या फिर यह मामला भी प्रभाव और राजनीति के बीच दबकर रह जाएगा?

फिलहाल मामले में किसी भी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से जवाब आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है

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