
शिवजयंती नाचकर नहीं, पढ़कर मनाएं — एडवोकेट शंकर चव्हाण
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे | :छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती केवल शोभायात्रा, डीजे और नृत्य के माध्यम से नहीं, बल्कि उनके विचारों का अध्ययन कर, इतिहास पढ़कर और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेकर मनाई जानी चाहिए। यह प्रतिपादन मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एडवोकेट शंकर चव्हाण ने पुणे में आयोजित शिवजन्मोत्सव कार्यक्रम में किया।
“शिवजयंती नाचकर नहीं, बल्कि पढ़कर मनाएं,” यह स्पष्ट संदेश उन्होंने उपस्थित युवाओं को दिया।
कार्यक्रम में बोलते हुए एडवोकेट चव्हाण ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक पराक्रमी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि दूरदर्शी प्रशासक, उत्कृष्ट न्याय व्यवस्था के शिल्पकार और लोककल्याणकारी राज्य के जनक भी थे। उनके जीवन के मूल्य, नीतियां और विचार यदि आज की पीढ़ी समझे, तो समाज और राष्ट्र अधिक सक्षम बन सकता है।
उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि आज कई स्थानों पर शिवजयंती केवल उत्सव तक सीमित रह गई है और उनके विचारों की गहराई कहीं खोती जा रही है।
एडवोकेट चव्हाण ने आगे कहा कि स्वराज्य की संकल्पना प्रस्तुत करते समय महाराज ने न्याय, समानता, महिला सम्मान और सर्वधर्म समभाव जैसे मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया था। “महाराज का चरित्र पढ़ने से स्पष्ट होता है कि उन्होंने सत्ता का उपयोग सेवा के रूप में किया। आज के राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र में यही सीख सबसे अधिक आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डीजे के शोर में शिवाजी महाराज का इतिहास खोना नहीं चाहिए। उनके गढ़-किलों, पत्र व्यवहार और प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन होना चाहिए। अध्ययन से ही विवेक, राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
उन्होंने स्कूलों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं से शिवचरित्र को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का अध्ययन करने और शिवजयंती को वैचारिक रूप से मनाने का संकल्प लिया।
एडवोकेट शंकर चव्हाण के इस विचार ने शिवप्रेमियों के बीच नई चर्चा और आत्ममंथन को प्रेरित किया है।


