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विधिमंडल के लिए ‘राष्ट्रीय विधिमंडल निर्देशांक’ आवश्यक — दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता

15वीं भारतीय छात्र संसद का उद्घाटन समारोह सम्पन्न

विधिमंडल के लिए ‘राष्ट्रीय विधिमंडल निर्देशांक’ आवश्यक — दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता

15वीं भारतीय छात्र संसद का उद्घाटन समारोह सम्पन्न

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: “संसद में जाने वाले जनप्रतिनिधि किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि आम जनता के प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए संसद की गरिमा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यहां विवेक, संयम, तर्क-वितर्क और जनसमस्याओं पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए तथा उसमें खेल भावना भी होनी चाहिए। विधिमंडलों के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधिमंडल निर्देशांक’ होना चाहिए, जिससे प्रत्येक राज्य के विधिमंडल के कार्य का पारदर्शी मूल्यांकन जनता के सामने प्रस्तुत किया जा सके और ठोस निष्कर्ष निकाले जा सकें,” ऐसा मत विजेंदर गुप्ता ने व्यक्त किया।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद में संवाद की संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए विधायक चर्चा और परस्पर सम्मान आवश्यक है।

MIT World Peace University, पुणे तथा MIT School of Government के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय 15वीं ‘भारतीय छात्र संसद’ के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वे संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने की।

 

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक राजदीप सरदेसाई तथा जर्मनी के हैम्बर्ग से जलवायु परिवर्तन प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. वॉल्टर लील फिल्हो विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

साथ ही भारतीय छात्र संसद के संस्थापक एवं एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस, विद्यार्थी प्रतिनिधि सुमित खैरे, पायल झा, निखिल मिश्रा और अक्षिता सक्सेना भी उपस्थित रहे।

लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मान्यवरों ने प्रतीकात्मक रूप से ‘बेल ऑफ डेमोक्रेसी’ का घंटानाद किया।

विजेंदर गुप्ता ने कहा कि राजनीति और खेल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। संसद में देश के विकास, परंपरा और भविष्य निर्माण पर चर्चा होनी चाहिए। खेल की तरह ही राजनीति में भी राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र एक पवित्र मंदिर है, जहां लिए गए निर्णय पूरे समाज के हित में होते हैं। दुर्भाग्यवश आज राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। मीडिया की भी जिम्मेदारी है कि वह केवल हंगामे को दिखाने के बजाय मुद्दों पर आधारित चर्चाओं को प्राथमिकता दे।

दिग्विजय सिंह ने कहा, “राजनीति में दिखावे की नहीं, बल्कि गरीब और पीड़ित वर्ग की सेवा की भावना आवश्यक है। राष्ट्रवाद का अर्थ द्वेष नहीं होता। मैं जब मुख्यमंत्री था, तब कभी भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ द्वेषपूर्ण राजनीति नहीं की। वर्तमान राजनीति में विरोध की भावना बढ़ती जा रही है। हम सबसे पहले भारतीय हैं, धर्म और जाति बाद में आते हैं। किसी को देशभक्त या देशद्रोही घोषित करने का अधिकार किसी के पास नहीं है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए संविधान की रक्षा आवश्यक है।”

 

राजदीप सरदेसाई ने कहा, “राजनीति में प्रतिस्पर्धा खेल की तरह नियमबद्ध, सम्मानजनक और पराजय को स्वीकार करने की भावना के साथ होनी चाहिए। देश में जब कोई बड़ी समस्या उत्पन्न होती है, तो जो व्यक्ति आगे आता है वही सच्चा नेता होता है। निष्ठा और परिश्रम से ही नए भारत का निर्माण संभव है।”

डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि विश्व में बढ़ते तनाव और अशांति के बीच आज दुनिया की नजर भारत पर टिकी है। भारत को ‘विश्वगुरु’ बनने के लिए जाति-पाति से ऊपर उठकर कार्य करना होगा। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से ही वैश्विक शांति स्थापित की जा सकती है।

डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि इस छात्र संसद के माध्यम से लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और समाज में सुशासन स्थापित करने में सहायता मिल रही है। राजनीति में उच्च शिक्षित युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से छात्र संसद की शुरुआत की गई है।

इसके पश्चात प्रो. वॉल्टर लील फिल्हो ने सतत विकास के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल तथा पद्मश्री मार्क टुली को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस ने स्वागत भाषण दिया।

डॉ. गौतम बापट ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि डॉ. प्रसाद खांडेकर ने आभार व्यक्त किया।

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