
लावणी महाराष्ट्र की लोककला और अस्मिता; इसका संरक्षण समय की आवश्यकता – अधिवक्ता शंकर चव्हाण
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे:महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की पहचान मानी जाने वाली लावणी कला आज आधुनिकता की चमक-दमक में कहीं न कहीं विलुप्त होती नजर आ रही है। ऐसे समय में अंबाजोगाई में आयोजित राज्यस्तरीय लावणी महोत्सव के माध्यम से इस लोककला को नवसंजीवनी देने का सराहनीय प्रयास किया गया। दैनिक लोकनायक एवं न्यूज लोकमन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राज्यस्तरीय लावणी प्रतियोगिता का उद्घाटन अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों की उपस्थिति ने इस महोत्सव को एक सांस्कृतिक पर्व का स्वरूप प्रदान किया।
इस भव्य लावणी महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता Shankar Chavan ने अपने संबोधन में लावणी के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, “लावणी केवल एक नृत्य शैली नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की लोककला, इतिहास, संघर्ष और जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। वर्तमान समय में इस कला को सम्मानजनक मंच प्रदान करना समाज और शासन, दोनों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लावणी के संरक्षण से ही महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सकती है।

उद्घाटन समारोह के दौरान पुलिस निरीक्षक शरद जोगदंड ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लुप्त होती इस लोककला को जीवंत बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने न्यूज लोकमन के माध्यम से संजय जोगदंड द्वारा ग्रामीण एवं लोककलाओं को मंच प्रदान करने के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में अंबाजोगाई के युवा उद्यमी एवं दिग्विजय कन्स्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स के प्रमुख दिग्विजय बाळासाहेब सोनवणे, चव्हाण मोटर्स के विकास चव्हाण, अश्विनी मेडिकल फाउंडेशन की अध्यक्षा स्वाती दहिवडे तथा सुनंदा वाघमारे सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की विशेष उपस्थिति रही। इनकी उपस्थिति से कार्यक्रम को सामाजिक एवं सांस्कृतिक आधार प्राप्त हुआ।
राज्य के विभिन्न भागों से आए लावणी कलाकारों ने आद्यकवि मुकुंदराज सांस्कृतिक सभागृह में एक से बढ़कर एक आकर्षक, प्रभावशाली एवं भावपूर्ण लावणियों की प्रस्तुति दी। पारंपरिक एवं आधुनिक शैली का सुंदर समन्वय इन प्रस्तुतियों में देखने को मिला। अंबाजोगाई के नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर इस महोत्सव का भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध कवि एवं नाट्यकलाकार अनंत कांबळे ने प्रभावी एवं रोचक शैली में किया। उनके संयोजन ने लावणी की परंपरा, सामाजिक संदर्भ तथा कलाकारों के योगदान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। पूरे सभागार में कला, संस्कृति और परंपरा का उत्सवी वातावरण व्याप्त रहा।
अधिवक्ता शंकर चव्हाण ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, “डिजिटल युग में भी लावणी जैसी लोककला की प्रासंगिकता बनी हुई है। आवश्यकता है उचित मंच, सम्मान और निरंतरता की। ऐसे महोत्सवों के माध्यम से नई पीढ़ी को लोककला से परिचित होने का अवसर मिलता है तथा कलाकारों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।” उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए लावणी कलाकारों के संघर्ष को नमन किया।

यह राज्यस्तरीय लावणी महोत्सव केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण उपक्रम सिद्ध हुआ। भविष्य में भी लोककला के संरक्षण हेतु ऐसे आयोजनों के व्यापक स्वरूप में निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की गई। अंबाजोगाई में आयोजित यह लावणी महोत्सव महाराष्ट्र की लोककला का उत्सव, कलाकारों के परिश्रम का सम्मान एवं सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक बनकर रहना है।


