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कृषि यंत्रीकरण को अपनाने से खेती की लागत घटी

कृषि यंत्रीकरण को अपनाने से खेती की लागत घटी

रिपोर्ट:  विशाल समाचार

स्थान: रीवा मध्य प्रदेश

रीवा . जिले के सिरमौर विकासखण्ड के ग्राम गोदहा के प्रगतिशील किसान सुरेन्द्र कुमार वर्मा ने आधुनिक कृषि यांत्रिकीकरण को अपनाकर न केवल अपनी खेती की लागत घटाई, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन में भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। श्री वर्मा ने सुपर सीडर कृषि यंत्र को अनुदान पर एक लाख 20 हजार रूपये प्राप्त किया। इस यंत्र की मदद से उन्होंने गेंहू, सरसों, मूंग और धान जैसी फसलों की बुवाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेषों (पराली) का कुशल प्रबंधन किया। सुपर सीडर ने फसल अवशेष को मिट्टी में मिला दिया, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ी और पर्यावरण से भी बचाव हुआ। पिछले दो वर्षों में श्री वर्मा ने औसतन 300 एकड़ क्षेत्र में सुपर सीडर का उपयोग किया। उन्होंने न केवल अपने खेतों में बल्कि आसपास के किसानों को भी इस तकनीक का लाभ दिलाया, जिससे क्षेत्र में पराली जलाने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय कमी आई। फसल अवशेष मिट्टी में समाहित होने से उसमें जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ी साथ ही भूमि की जल धारण क्षमता में वृद्धि हुई। रासायनिक उर्वरकों की खपत कम हुई तथा फसल की उत्पादकता में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इन सभी सुधारों का सीधा प्रभाव उनकी आमदनी पर पड़ा। लागत घटने और उपज बढ़ने से श्री वर्मा की प्रति हेक्टेयर आय में 10-15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त सुपर सीडर के माध्यम से अन्य किसानों के खेतों में कार्य करके उन्होंने अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित की। किसान सुरेन्द्र कुमार वर्मा अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि अगर किसान नई तकनीक को अपनाए और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करें, तो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी संभव है। सुपर सीडर की सहायता से पराली का उचित प्रबंधन बिना आग लगा करके किया जा सकता हैं। जिसमें पराली को मिट्टी में मिलाकर फसल की बुवाई का काम एक साथ होता है अलग से किसान को खेत तैयार करने की आवश्यकता नहीं होती है तथा समय पर गेंहू की बुवाई का कार्य पूर्ण होता है। इस प्रकार लगने वाले श्रम, समय एवं लागत में कमी आती है। इससे एकड़ कम से कम 3000 रूपये की बचत तथा समय से बुवाई होने के कारण न्यूनतम 10 प्रतिशत उपज में वृद्धि होती है।

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