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सामाजिक समता के लिए सरकार का कदम स्वागतयोग्य – डॉ. हुलगेश चलवादी

सामाजिक समता के लिए सरकार का कदम स्वागतयोग्य – डॉ. हुलगेश चलवादी

बहुजन समाज पर अत्याचार रोकने के लिए कानूनों का कड़ाई से पालन जरूरी

रिपोर्ट:विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: सामाजिक समता के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाया गया कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन बहुजन समाज पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए कठोर नियमों का सख्ती से पालन होना अत्यंत आवश्यक है। यह विचार बहुजन नेता और पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने शनिवार (7 मार्च) को व्यक्त किए।

हाल ही में प्रस्तुत राज्य के बजट में क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती, संत गाडगेबाबा की 150वीं जयंती तथा वर्ष 2026-27 को सामाजिक समता और समरसता वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा किए जाने पर डॉ. चलवादी ने राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा सामाजिक परिवर्तन लाने वाले महान व्यक्तित्वों के कार्यों के सम्मान के लिए समिति गठित कर विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम चलाने की घोषणा सराहनीय है। इसके साथ ही संत गाडगेबाबा ग्राम योजना को लागू करने और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़े महाड स्थित चवदार तालाब परिसर के विकास के निर्णय का भी उन्होंने स्वागत किया।

डॉ. चलवादी ने कहा कि इन प्रयासों के बावजूद देश और राज्य में बहुजन समाज पर अत्याचार की घटनाओं में कमी दिखाई नहीं दे रही है। अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों में भी वृद्धि हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में अनुसूचित जातियों पर अत्याचार के 57,789 मामले दर्ज हुए, जो प्रति लाख जनसंख्या पर 28.7 की दर है। अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार के 12,960 मामले दर्ज हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत अधिक हैं।

महाराष्ट्र में भी ऐसे मामलों की संख्या उल्लेखनीय है। राज्य में अनुसूचित जातियों पर अत्याचार के लगभग 2,794 मामले दर्ज किए गए, जो प्रति लाख अनुसूचित जाति जनसंख्या पर लगभग 15.5 की दर है। वहीं अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार के लगभग 482 मामले दर्ज हुए, जिनकी दर प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 7.4 है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह दर कुछ कम जरूर है, लेकिन घटनाओं की संख्या चिंता का विषय है।

डॉ. चलवादी ने मांग की कि सामाजिक समता वर्ष मनाते समय बहुजन समाज पर हो रहे अन्याय को रोकने के लिए अत्याचार निवारण कानून का सख्ती से पालन किया जाए, न्याय प्रक्रिया को तेज किया जाए और पीड़ितों को त्वरित संरक्षण देने वाली व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक समता केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू किया जाना चाहिए।

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