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कर्जमाफी के नाम पर किसानों की फसवणूक, 2029 में जनता जवाब देगी – एड. शंकर चव्हाण

मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने युती सरकार पर शब्दभंग का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को केवल झूठे वादे देकर धोखा दिया गया।

कर्जमाफी के नाम पर किसानों की फसवणूक, 2029 में जनता जवाब देगी – एड. शंकर चव्हाण

मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने युती सरकार पर शब्दभंग का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को केवल झूठे वादे देकर धोखा दिया गया।

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान : मुंबई,महाराष्ट्र

मुंबई।राज्यातील किसानों को दिए गए कर्जमाफी के वादों पर तीव्र आक्रोश जताते हुए मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एडवोकेट शंकर चव्हाण ने युती सरकार पर शब्दभंग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि “कर्जमाफी के नाम पर किसानों की फसवणूक की गई है और 2029 के चुनाव में जनता इस विश्वासघात का जवाब देगी।”

सोशल मीडिया पर अपने बयान में उन्होंने राज्य में किसानों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए सरकार की नीति पर कड़ी आलोचना की।

एडवोकेट चव्हाण के अनुसार, चुनाव से पहले राज्य के किसानों को कर्जमाफी का भरोसा दिलाया गया था। कई किसानों ने इस भरोसे के आधार पर बड़ी उम्मीदें लगाईं, लेकिन वास्तविकता में घोषित कर्जमाफी योजना में केवल दो लाख रुपये तक की सीमा रखी गई। इससे बड़ी संख्या में किसान योजना से बाहर रह गए। उन्होंने कहा, “किसानों के कंधों पर जो कर्ज का बोझ है, दो लाख रुपये की सीमा केवल उनकी जख्म पर पानी का छींटा डालने जैसा है।”

चव्हाण ने बताया कि महाराष्ट्र के किसान कई वर्षों से अवकाली बारिश, सूखा और फसल की उचित कीमत न मिलने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उत्पादन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन बाजार भाव स्थिर नहीं है। उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की कीमतों में वृद्धि ने किसानों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है। ऐसे में सरकार को बड़ा और ठोस निर्णय लेना चाहिए था।

उनका कहना है कि कर्जमाफी सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व का प्रश्न है। “किसान देश का अन्नदाता है। उसकी मेहनत पर पूरा देश टिका है। लेकिन आज उसे जीविका के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

एडवोकेट चव्हाण ने कहा कि राज्य के कई किसान अभी भी बैंकों और साहूकारों के कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। कुछ को कर्ज चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचनी पड़ती है, तो कुछ स्थानों पर आत्महत्या जैसे टोक़ के निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने सरकार से कहा कि इस समस्या की ओर संवेदनशीलता से ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले बड़े वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। “यह केवल राजनीतिक गलती नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का धोखा है। बड़े वादे कर सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा न करना जनते की फसवणूक है।”

एडवोकेट चव्हाण ने सरकार से अनुरोध किया कि किसानों को न्याय देने के लिए व्यापक और दीर्घकालीन नीति बनाई जाए। सिर्फ कर्जमाफी घोषित करना पर्याप्त नहीं। सरकार को हमी भाव, बाजार स्थिरता, सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीक और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि किसानों को उचित मूल्य और स्थिर आय मिले, तो कर्जमाफी की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।”

सोशल मीडिया पर उनके बयान में 2029 के चुनाव के बारे में भी चेतावनी दी गई हैमहाराष्ट्र की जनता सब देख रही है। किसानों को दिए वादे पूरे नहीं हुए, यह जनता के ध्यान में है। इसलिए 2029 के चुनाव में जनता इस मुद्दे पर अपना निर्णय ज़रूर देगी।”

चव्हाण ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे बड़ा आधार होता है। यदि सरकार द्वारा दिया गया वादा पूरा नहीं होता, तो जनता का विश्वास घटता है। “झूठे वादों पर राजनीति करना संभव है, लेकिन दीर्घकालीन विश्वास बनाए रखना असंभव।”

अंत में एडवोकेट शंकर चव्हाण ने राज्य सरकार से पुनः अनुरोध किया कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से देखें। व्यापक कर्जमाफी और कृषि सुधार करके उन्हें राहत दी जाए। अन्यथा बढ़ता असंतोष और नाराजगी भविष्य में राजनीतिक प्रभाव डाल सकती है।

उन्होंने स्पष्ट कहा, “किसान बचा तो देश बचा। सरकार को इसे ध्यान में रखना चाहिए।”

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