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कविता से समाज में बदलाव आ सकता है सम्मेलन अध्यक्ष चंद्रकात शहासने के विचारः दूसरे राज्यस्तरीय काव्य विश्व साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन

कविता से समाज में बदलाव आ सकता है सम्मेलन अध्यक्ष चंद्रकात शहासने के विचारः दूसरे राज्यस्तरीय काव्य विश्व साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे, : कविता से साहित्य पैदा होता है. अगर कविता को जिंदा रहना है, तो समय को महत्व देना होगा. कविता वह साहित्य है जो भावनाओं, विचारों, अनुभवों और आइडिया को जाहिर करता है. वह एक पावरफुल मीडियम है और इसके जरिए सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है. ऐसे विचार दूसरे राज्य स्तरीय काव्यविश्व साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष देशभक्त कोषाकार चंद्रकात शहासाने ने व्यक्त किए.

काव्यमित्र संस्था, पुणे और अपेक्षा मासिक परिवार द्वारा श्रमिक पत्रकार भवन में आयोजित दूसरे राज्य स्तरीय काव्यविश्व साहित्य सम्मेलन २०२६ के उद्घाटन मौके पर बोल रहे थे.

इस मौके पर जाने माने लेखक डॉ. जगताप, उद्घाटनकर्ता साहित्य प्रेमी प्रमोद कुमार बेलसरे, पहले काव्यविश्व साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और सीनियर लेखक श्याम भुरके बतौर मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद थे.

 

 

साथ ही अपेक्षा मासिक परिवार के संस्थापक संपादक दत्तात्रेय उभे और काव्यविश्व संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राजेंद्र सगर भी मौजूद थे.

यहां पर स्मरणिका प्रकाशन, अपेक्ष मैगजीन के महिला दिवस स्पेशल इश्यू का विमोचन अतिथियों ने किया.

इस सम्मेलन में विशेष लोगों ने जीवन गौरव पुरस्कार, साहित्य गौरव पुरस्कार और स्पेशल ग्रैटिट्यूट अवॉर्ड दिए. साथ ही कविता की दुनिया के अलग अलग टॉपिक पर प्रोग्राम भी पेश किए गए. यहां पर बुलाए गए कवियों और कवयित्रियों द्वारा अलग अलग टॉपिक पर कविताओं का प्रस्तूतीकरण, हास्य कविता साथ ही मराठी कविता की दुनिया में संत साहित्य के महत्व पर सिपोंजियम हुआ.

चंद्रकांत शहासने ने कहा, कविता एक फरिश्ता है. यह समाज के मन को दिखाती है. अंगाई, पोवाडा, भूपाली को कविता के प्रकार कहा जा सकते है. कविता इमोशनल एक्सप्रेशन, आसान भाषा, तुकबंदी और लय, कल्पना और सिंबल का सबसे अच्छा मेल है.

प्रमोद कुमार बेलसरे ने कहा, कविता और लेखन समाज की हर चीज पर हमला करते हैं. यह कोई पोएट्री वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस नहीं है, लेकिन जिनकी दुनिया ही पोएट्री है, उनके इस कॉन्फेंस में भाषा की मिठास समझ में आती है.

श्याम भुरके ने कहा, हजारों साल पहले सातवहन राजा ने जो किताबों का कलेक्शन संभालकर रखा था. उसमें पता चला कि किसान काम करते समय मराठी में कविताऍ और गाने गुनगुनाते थे. आज इन्हीं रिकॉर्डस की वजह से मराठी भाषा को क्लासिकल दर्जा मिला है.

चंद्रलेखा बेलसरे ने कहा, हर राइटर अपनी प्रैक्टिस से भावनाओं को पोएट्री में जाहिर करता है. एक्सप्रेशन, घटनाओं की ट्रैकिंग, मौजूदा हालात और इन सब चीजों की वजह से पोएट्री बनती है और हर कोई अपना सा लगता है.

 

डॉ. संजय जगताप ने अपने स्वागतपर भाषण में कहा, यह गर्व की बात है कि लिटरेटर के फील्ड में सबसे ज्यादा मराठी लिटरेचर पब्लिश हुए हैं. १५० मिलियन मराठी बोलने वाले लोगों की वजह से ९५ देशों में मराठी मंडल बने है. आज ऑस्ट्रेलिया में मराठी स्कूल हैं और यहां २९ छात्रों ने एडमिशन लिया है.

अपेक्षा मासिक परिवार के संस्थापक संपादक दत्तात्रेय उभे ने इंड्रोडक्शन दिया.

राजेंद्र सगर ने प्रोग्राम को मॉडरेट किया. अधिक जानकारी के लिए  काव्यमित्र संस्था पुणे आणि अपेक्षा मासिक परिवार

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