हेनकेल ने भारत के कुरकुंभ में कार्बन-तटस्थ संयंत्र के साथ कार्बन-मुक्त उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम उठाया
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: हेनकेल ने भारत में कुरकुंभ और तुर्की में गेबकिम में कार्बन-तटस्थ उत्पादन हासिल करके अपने एडहेसिव टेक्नोलॉजीज कारोबार में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की एक नई मिसाल कायम की है। इन दोनों कारखानों में स्कोप 1 और स्कोप 2 उत्सर्जन पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं, जो 2030 तक परिचालन को कार्बन-मुक्त करने की हेनकेल की कोशिश में एक बड़ा कदम है।
ये उपलब्धियां हेनकेल के विज्ञान-आधारित जलवायु लक्ष्यों को और मजबूत करती हैं। इसका पूरा जोर ऊर्जा बचत, बिजलीकरण और जीवाश्म ईंधन को धीरे-धीरे बंद करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ दुनियाभर के सभी कारखानों में नवीकरणीय ऊर्जा का दायरा बढ़ाने पर है।
कुरकुंभ में फर्नेस ऑयल से चलने वाले थर्मिक फ्लूइड हीटरों की जगह उच्च दक्षता वाले इलेक्ट्रिक सिस्टम लगाकर जीवाश्म ईंधन का उपयोग पूरी तरह बंद किया गया। इसके लिए कारखाने के ऊर्जा ढांचे को बड़े पैमाने पर बदलना पड़ा, जिसमें हीट लोड को बेहतर बनाना, उन्नत हीट एक्सचेंजर्स लगाना और पूर्ण बिजलीकरण के लिए बिजली क्षमता में भारी निवेश शामिल था। 100% नवीकरणीय बिजली अपनाने के साथ इन कदमों से लगभग 11,300 टन CO2 के बराबर स्कोप 1 और स्कोप 2 दोनों उत्सर्जन पूरी तरह खत्म हो गए।
तुर्की के गेबकिम प्लांट में हेनकेल ने प्राकृतिक गैस से चलने वाले बॉयलर की जगह उच्च दक्षता वाला इलेक्ट्रिक बॉयलर सिस्टम लगाया। इससे कारखाने में जीवाश्म ईंधन का सीधा इस्तेमाल बंद हो गया, स्कोप 1 उत्सर्जन शून्य हो गया और हर साल करीब 956 टन CO2 के बराबर उत्सर्जन की बचत होने लगी।
हेनकेल एडहेसिव टेक्नोलॉजीज के वीपी सप्लाई चेन एवं ऑपरेशंस आईएमईए, साइमन उलमैन ने कहा, “आईएमईए में हमारे दो प्रमुख कारखानों पर कार्बन-तटस्थ उत्पादन हासिल करना हेनकेल एडहेसिव टेक्नोलॉजीज के वैश्विक पर्यावरण लक्ष्यों की दिशा में एक ठोस कदम है।
“हमारा इरादा बिल्कुल साफ है: हम अपने सभी कारखानों से जीवाश्म ईंधन को व्यवस्थित तरीके से हटा रहे हैं और उनकी जगह नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाली इलेक्ट्रिक प्रक्रियाएं अपना रहे हैं। कुरकुंभ और गेबकिम की यह उपलब्धि बताती है कि हम अपनी रणनीति को जमीन पर असली बदलाव में कैसे उतार सकते हैं और नेट-ज़ीरो की ओर अपनी यात्रा को कैसे तेज कर सकते हैं।”
हेनकेल एडहेसिव टेक्नोलॉजीज के डायरेक्टर ऑपरेशंस एवं प्रोजेक्ट्स इंडिया, बप्पा बंदोपाध्याय ने कहा, “कुरकुंभ में कार्बन-तटस्थता हासिल करना पर्यावरण के अनुकूल विकास, जिम्मेदार उत्पादन और बेहतर कामकाज के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और लगातार सुधारों के जरिए हमने सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रदर्शन के उच्चतम मानक बनाए रखते हुए अपना कार्बन फुटप्रिंट काफी कम किया है। यह उपलब्धि बताती है कि पर्यावरण की देखभाल और अच्छा कारोबार साथ-साथ चल सकते हैं।”
बिजलीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा का दायरा बढ़ाकर हेनकेल अपने वैश्विक उत्पादन नेटवर्क को कार्बन-मुक्त करने की रफ्तार तेज कर रहा है। ये बदलाव कंपनी के नेट-ज़ीरो लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जिसका मकसद अपने परिचालन और पूरी वैल्यू चेन का कार्बन फुटप्रिंट घटाना और ग्राहकों को उनके पर्यावरण लक्ष्य पूरे करने में मदद करना है। यह उपलब्धि यह भी साबित करती है कि जीवाश्म ईंधन-मुक्त उत्पादन न सिर्फ मुमकिन है, बल्कि इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है।



