
जुगाड इंडियन रिसर्च की खासियत कैम्ब्रिज यूनविर्सिटी के प्रो जयदीप प्रभु के विचार: फ्यूल में लीन स्पार्क का विमोचन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे ,: भारतीय अनुसंधान की खासियत यह है सीमित स्त्रोत का इस्तेमाल करके मुश्किल समस्या को हल करना. कम खर्चीले शोध, अस्थायी समाधान और लचीलापण और गती के जरिए अपरंपरागत खोज को जुगाड कहा जा सकता है. यह विचार कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के जज बिजनेस स्कूल के इंडियन बिजनेस के नेहरू प्रो. और लेखक जयदीप प्रभु ने कहा.
फ्यूल बिजनेस स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रो. जयदीप प्रभु की लिखी किताब लीन स्पार्क के विमोचन पर वे बोल रहे थे.
इस मौके पर फ्यूल ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूटस के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. केतन देशपांडे और प्रो. मयूरी देशपांडे मौजूद थे.
प्रो. जयदीप प्रभु ने कहा, लीन स्पार्क की चार खासियते हैं लीन कार्यान्वयन जरूरी है और संरचित प्रयोग और लगातार सीखते रहना है. इसमें मकसद वाली सादगी होनी चाहिए जो फीचर्स और गैर जुररी मुश्किलों को हटा दे और अलग अलग माहौल में एडैप्टिव स्केलेबिलिटी के साथ उन्नत होने के लिए डिजाइन करे.
साथ ही बडी संस्था के लिए काम करते समय बहुत कुछ सीखे, फुर्तीला होना सीखे, बाहर किए गए ग्रुप को शामिल करें, कर्मचारियों को एक्सपेरिमेंट करने का समय और मौके दें. एजाइल एंटरप्रेन्योर्स के साथ जुडें और उभरते मार्केट के साथ जुडकर गैंबल करना सीखने का माइंडसेट रखें. इसी तरह छोटी संस्था को बडी संस्था के साथ पार्टनरशिप करना सीखना चाहिए.

डॉ. केतन देशपांडे ने कहा, फ्यूल इंस्टीट्यूट राष्ट्र निर्माण के लिए काम कर रहा है. युवाओं के इस देश में, कौशलपूर्ण शिक्षा के जरिए भारत को आत्मनिर्भर बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. भारत एक इकोनॉमिक सुपरपावर के तौर पर उभर रहा है, ऐसे में अनुसंधान अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए. अभी देश को कौशल्यपूर्ण युवाओं की जरुरत है.
इस मौके पर लेखक जयदीप प्रभु ने छात्रों को नेतृत्व गुण, कडी मेहनत, रिसर्च और कम लागत पर सामाजिक समस्या को हल करने की कोशिश के बारे में उनसे बातचीत करने की सलाह दी. इसके बाद छात्रों ने उनके पूछे गए सवालों के जवाब दिए.
कार्यक्रम का संचालन छात्र सान्वी जोगदंड ने किया.



