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हाथीपांव (फाइलेरिया) उन्मूलन के लिए ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ अभियान तेज

हाथीपांव (फाइलेरिया) उन्मूलन के लिए ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ अभियान तेज

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान: पुणे महाराष्ट्र

 

मुंबई, ( सोहन सिंह ): महाराष्ट्र सहित पूरे देश में हाथीपांव (लिम्फैटिक फाइलेरियासिस) के उन्मूलन के लिए ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ (आईडीए) अभियान को गति दी जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 तक भारत को इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य रखा है और राज्य सरकार इसमें सक्रिय सहयोग कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस थेरेपी में आइवरमेक्टिन, डीईसी (डायइथिलकार्बामाजीन) और एल्बेंडाजोल दवाओं का संयुक्त रूप से उपयोग किया जा रहा है, जो पारंपरिक उपचार से अधिक प्रभावी है। विशेष रूप से विदर्भ के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान से लोगों को काफी राहत मिली है।

55 लाख लोगों को मिलेगा लाभ

राज्य में ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (एमडीए) अभियान के तहत करीब 55

 

लाख नागरिकों को दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। महाराष्ट्र के 18 जिलों—नागपुर, चंद्रपुर, भंडारा, गडचिरोली, वर्धा, अमरावती, अकोला, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, जळगांव, सिंधुदुर्ग, नांदेड, ठाणे, पालघर, नंदुरबार और यवतमाल—में यह अभियान चलाया जा रहा है।

नागपुर में बड़ा असर

फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कुल मामलों में से करीब 75 प्रतिशत मरीज नागपुर विभाग में हैं। हालांकि ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ के प्रभाव से नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में माइक्रोफिलेरिया (एमएफ रेट) 2014 के 4.91% से घटकर 2024 में 1% से भी कम हो गया है, जो बड़ी सफलता मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपचार पद्धति रोग फैलाने वाले परजीवियों को तेजी से कम करती है, जिससे संक्रमण पर नियंत्रण संभव होता है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में ही दवाएं लें, क्योंकि जनसहभागिता के बिना इस बीमारी का उन्मूलन संभव नहीं है।

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