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सामाजिक संवेदनशीलता और जनभावना को प्राथमिकता देना आवश्यक – डॉ. हुलगेश चलवादी

बारामती उपचुनाव: कांग्रेस की भूमिका पर आरपीआई की आलोचना

सामाजिक संवेदनशीलता और जनभावना को प्राथमिकता देना आवश्यक – डॉ. हुलगेश चलवादी

बारामती उपचुनाव: कांग्रेस की भूमिका पर आरपीआई की आलोचना

रिपोर्ट:विशाल समाचार 

स्थान  पुणे महाराष्ट्र

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले द्वारा बारामती उपचुनाव को निर्विरोध कराने के आह्वान का समर्थन करते हुए पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने कांग्रेस की भूमिका की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक दल को चुनाव लड़ने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सामाजिक संवेदनशीलता और जनभावना को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है।

डॉ. चलवादी ने कहा कि अजित दादा का महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उनके निधन के बाद उनके परिवार के प्रति सम्मान प्रकट करने का यह उचित समय था। ऐसी स्थिति में सुनेत्रा वहिनी के खिलाफ उम्मीदवार न उतारकर चुनाव को निर्विरोध कराने का निर्णय महाराष्ट्र की परंपरा के अनुरूप होता। उन्होंने बताया कि आठवले साहब की यही स्पष्ट भूमिका रही है।

उन्होंने आगे कहा कि सुनेत्रा वहिनी महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं और उन्हें निर्विरोध निर्वाचित करना उनके प्रति सम्मान का प्रतीक होता। यह अजित दादा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती।

आरपीआई (आ) की भूमिका को दोहराते हुए डॉ. चलवादी ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और कृतज्ञता की भावना को बनाए रखने का विषय है। कांग्रेस द्वारा इस अवसर पर उम्मीदवार खड़ा करना जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए लिया गया राजनीतिक निर्णय है, जो महाराष्ट्र की सुसंस्कृत परंपरा के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि जनभावनाओं को समझकर निर्णय लेना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है और आठवले साहब की भूमिका इसी दिशा में मार्गदर्शक है। डॉ. चलवादी ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी चुनाव में जनता इस सोच का समर्थन करेगी।

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