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इटावा नगरपालिका में घमासान: डीपीआरओ रिटायरमेंट पर सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

इटावा नगरपालिका में घमासान, डीपीआरओ रिटायरमेंट पर उठे सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: इटावा उत्तर 

इटावा। नगरपालिका में चल रहे आंतरिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) से जुड़ा मामला भी लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शहर में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता देवेन्द्र सिंह तोमर द्वारा जुलाई माह से लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। शिकायतों में मांग की गई है कि संबंधित डीपीआरओ के कार्यकाल की जांच उत्तर प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय एजेंसियों—जैसे विजिलेंस, एटीएस, खुफिया विभाग तथा सीबीआई—से कराई जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

शिकायतकर्ता का कहना है कि डीपीआरओ को समय से पहले सेवानिवृत्ति (प्री-मैच्योर रिटायरमेंट) किस आधार पर दी गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि पहले पूरे मामले की जांच पड़ताल होनी चाहिए थी, उसके बाद ही सेवानिवृत्ति का निर्णय लिया जाना चाहिए था।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सेवानिवृत्ति के बाद भी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच बैठाई गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि इटावा के डीपीआरओ के मामले में अब तक उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई।

शिकायतकर्ता का कहना:

“जब अन्य मामलों में रिटायरमेंट के बाद भी जांच होती है, तो यहां क्यों नहीं? जनता का सरकार पर विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।”

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि समय से पहले सेवानिवृत्ति दिए जाने के बावजूद भी मामले की जांच कराना आवश्यक है। उनका मानना है कि उच्च एजेंसियों द्वारा जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।

सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रकरण में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रशासन की चुप्पी:

अब तक इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जनता की मांग:

आमजन और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की है, ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें और यदि कोई अनियमितता हुई हो तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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