
नदी सुशोभीकरण में पर्यावरण संरक्षण को दें प्राथमिकता : पंकजा मुंडे
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: राज्य में बढ़ते जल प्रदूषण को नियंत्रित करने और प्रभावी उपाय लागू करने के लिए सरकार ने नदी पुनर्जीवन कार्यों हेतु एक स्वतंत्र ‘नदी पुनरुज्जीवन प्राधिकरण’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने निर्देश दिए कि नदी सुशोभीकरण के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
वह राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के अंतर्गत पुणे शहर की मुळा-मुठा नदी के प्रदूषण नियंत्रण परियोजना की समीक्षा बैठक में बोल रही थीं। बैठक में महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम, अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर, महापौर मंजुषा नागपुरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सांडपानी प्रकल्प पूर्ण क्षमता से चलाने के निर्देश
मंत्री मुंडे ने कहा कि कई उद्योगों में सांडपानी शोधन संयंत्र (STP) तो लगाए जाते हैं, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में वे बंद पड़े रहते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि पुणे के सभी STP पूरी क्षमता से संचालित हों और इस संबंध में कोई शिकायत न आए, इसकी जिम्मेदारी महानगरपालिका सुनिश्चित करे।
नए प्रोजेक्ट और नीति पर जोर
उन्होंने बताया कि औंध स्थित बॉटनिकल गार्डन में सांडपानी शोधन परियोजना के लिए कृषि विभाग की जमीन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी सांडपानी प्रबंधन के लिए नई नीति लाने हेतु विभिन्न जिलों का अध्ययन किया जाएगा।
अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए फंड
मंत्री ने स्पष्ट किया कि शहर के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था की जाएगी। साथ ही महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल का मुख्यालय पुणे में ही बनाए रखने के लिए प्रयास जारी हैं।
प्रोजेक्ट की स्थिति पर प्रस्तुतीकरण
बैठक में आयुक्त नवल किशोर राम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से शहर में उत्पन्न सांडपानी, उसकी प्रक्रिया क्षमता, मुख्य सीवर लाइन, परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और वित्तीय पहलुओं की जानकारी दी। वारजे, वडगांव, मुंढवा, हडपसर, खराड़ी, धानोरी, बाणेर और तानाजीवाड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई।


