
माणुसकी के बंध को मजबूत करने वाले बंधुता के विचारों की आज जरूरत
प्रो. सुभाष वारे का प्रतिपादन; पुणे में 28वें विश्वबंधुता साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: समाज में तेजी से फैल रहे द्वेष, असमानता और तनावपूर्ण माहौल को चिंताजनक बताते हुए वरिष्ठ चिंतक Prof. Subhash Ware ने कहा कि ऐसे समय में मानवता के बंधन को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म और क्षेत्रवाद के बढ़ते टकराव के बीच सभी महापुरुषों द्वारा दिए गए बंधुता के विचारों को अपनाना ही समय की मांग है, जिससे समाज में शांति और आपसी भाईचारा स्थापित हो सके।
वे 28th Vishwabandhuta Sahitya Sammelan के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। यह सम्मेलन विश्वबंधुता साहित्य परिषद, भारतीय जैन संघटना के वाघोली स्थित कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय तथा काषाय प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन S. M. Joshi Sabhagruh में किया गया, जिसकी अध्यक्षता बंधुताचार्य Prakash Rokde ने की।
प्रो. वारे ने कहा कि आज समाज में वर्चस्ववाद और प्रतिस्पर्धा की भावना से द्वेष बढ़ रहा है। संत परंपरा से लेकर Jyotirao Phule और Dr. B. R. Ambedkar तक सभी ने मानवता और बंधुता का संदेश दिया, लेकिन हम उनके विचारों को आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा में समान अवसर और नई तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर भी जोर दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रकाश रोकडे ने कहा कि समाज में जाति, धर्म और भाषा के आधार पर बने भेदभाव को समाप्त कर संविधान के मूल्यों—समता, स्वतंत्रता और बंधुता—का प्रसार करना जरूरी है। उन्होंने Chhatrapati Shivaji Maharaj, Jyotirao Phule, Shahu Maharaj और Dr. B. R. Ambedkar के विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अरुण आंधळे, वरिष्ठ कवि प्रा. चंद्रकांत वानखेड़े, उपन्यासकार प्रा. शंकर आथरे, निमंत्रक मंदाकिनी रोकडे, कार्याध्यक्ष डॉ. मनीषा बोरा, स्वागताध्यक्ष शरयू पवार और कवयित्री संगीता झिंजुर्के सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संगीता झिंजुर्के ने किया, जबकि प्रास्ताविक डॉ. मनीषा बोरा ने रखा और आभार प्रदर्शन प्रा. शंकर आथरे ने किया।
सम्मेलन में विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों का वितरण
सम्मेलन के दौरान क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले काव्य पुरस्कार से कई साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वहीं ‘वंदे संविधान’ काव्य सम्मेलन में Dr. Sushil Satpute को लोककवि वामनदादा कर्डक साहित्य पुरस्कार, विजय वासाडे को लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे साहित्य पुरस्कार तथा गोपाल कांबळे को पद्मश्री नामदेव ढसाल साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया।


