
पुणे : “लोकतंत्र संवाद” कार्यक्रम में एकजुट संघर्ष और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर जोर
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे : हुकूमशाही प्रवृत्ति वाली सत्ता के खिलाफ एकजुट होकर तीव्र और सतत संघर्ष करने तथा जनता के बीच लगातार अपनी भूमिका रखने की आवश्यकता है, ऐसी राय विचारकों ने व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की पुनर्स्थापना, संविधान की गरिमा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक नए सिरे से जुड़ाव का संकल्प युवा कांग्रेस को लेना चाहिए।
महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र संवाद’ कार्यक्रम के अंतर्गत अंधश्रद्धा निर्मूलन के लिए कार्य करने वाले डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, वरिष्ठ विचारक कॉ. गोविंद पानसरे, साहित्यकार एम. एम. कलबुर्गी, पत्रकार गौरी लंकेश और रोहित वेमुला के नाम पर वैचारिक अभियानों का उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा, वरिष्ठ विचारक विश्वंभर चौधरी, अधिवक्ता असीम सरोदे, सामाजिक कार्यकर्ता स्मिता पानसरे और हमीद दाभोलकर ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत लोकतंत्र संकल्प वृक्ष को पंचनदियों के संकल्प जल अर्पित कर की गई।
घोले रोड स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में उल्हास पवार, मोहन जोशी, अभय छाजेड, गोपाल तिवारी, प्रशांत जगताप, अजय चिकारा, शांभवी शुक्ला, शिवराज मोरे, प्रथमेश आबनावे सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मनीष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को जनता की यह धारणा तोड़नी होगी कि वह समय के साथ आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांधीजी की सर्वसमावेशी विचारधारा पर काम कर रही है और श्रमिक, किसान, महिलाएं, वंचित वर्ग के लिए सक्रिय है। उन्होंने युवा कांग्रेस को आंदोलन और नव निर्माण—दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विश्वंभर चौधरी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों का मूल अधिकार है, जिसकी रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष विचारों का दमन कर रहा है और समाज में वैचारिक विकृति फैलाई जा रही है।
असीम सरोदे ने आरोप लगाया कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था का राजनीतिकरण किया जा रहा है तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
हमीद दाभोलकर ने कहा कि यह अभियान किसी इवेंट के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली वैचारिक प्रतिबद्धता के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
स्मिता पानसरे ने कहा कि बदलाव के लिए स्पष्ट वैचारिक भूमिका और एकजुट संघर्ष आवश्यक है। बिना सामूहिकता के किसी आंदोलन का प्रभाव सीमित रह जाता है।
कार्यक्रम का संचालन अभिषेक अवचार ने किया तथा आभार प्रथमेश आबनावे ने व्यक्त किया।



