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धरवार पंचायत में “लूट का खेल” चरम पर! कागजों में करोड़ों का विकास, जमीन पर शून्य

ग्राम पंचायतों को नोटिस के नाम पर छिपा गहरा राज ?

धरवार पंचायत में “लूट का खेल” चरम पर! कागजों में करोड़ों का विकास, जमीन पर शून्य

ग्राम पंचायतों को नोटिस के नाम पर छिपा गहरा राज ?

गौशाला से लेकर सड़क-नाली तक हर योजना में घोटाले के आरोप, अब इंटरलॉकिंग और सफाई में भी खुली पोल

 

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान: धरवार, इटावा (यूपी)

दिनांक:5 मई 2026

धरवार ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर कथित घोटालों का ऐसा जाल सामने आ रहा है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। वर्ष 2018-19 के दौरान किए गए कार्य अब सवालों के घेरे में हैं और हर नई जानकारी के साथ भ्रष्टाचार की परतें और गहरी होती जा रही हैं।

गांव बिहारीपुर में मुन्ना लाल के घर से कन्हैया लाल के घर तक इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण के नाम पर करीब 2 लाख 40 हजार रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर ऐसा कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। कागजों में सड़क बनी, लेकिन जमीन पर आज भी हालात जस के तस हैं।

यही नहीं, राम प्रकाश के घर से हरी के अड्डा तक सीसी सड़क और नाली निर्माण के नाम पर करीब 6 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए। ग्रामीणों के अनुसार, यह काम भी सिर्फ फाइलों में ही पूरा कर दिया गया, जबकि हकीकत में वहां कोई ठोस निर्माण नजर नहीं आता

👉 सफाई के नाम पर भी बड़ा खेल!

धरवार पंचायत में पहले से सफाई कर्मचारी को सरकारी वेतन दिया जा रहा है, इसके बावजूद वर्ष 2018 में ही करीब 6 लाख 50 हजार रुपये सफाई कार्य में खर्च दिखाए गए। अब सवाल उठ रहा है—जब कर्मचारी मौजूद है, तो फिर लाखों रुपये किस काम में खर्च हुए?

👉 पुराने घोटाले भी अब घेरे में

इससे पहले गौशाला की बाउंड्री के नाम पर 2 लाख रुपये, हैंडपंप के नाम पर 25.50 लाख रुपये और प्राथमिक विद्यालय बिहारीपुर में मिट्टी भराव के नाम पर 4.14 लाख रुपये खर्च दिखाए जाने पर भी सवाल उठ चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में गौशाला तक मौजूद नहीं, फिर बाउंड्री कहां बनी?

👉 “पैसा इधर का, काम उधर?”

ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत का पैसा नगला रामसुंदर क्षेत्र में खर्च किया गया, जिससे पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।

👉 ग्रामीणों में गुस्सा, प्रशासन पर सवाल

लगातार सामने आ रहे इन मामलों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह कोई एक-दो काम की गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में “संगठित तरीके से लूट” का मामला है

👉 अब सबसे बड़ा सवाल

• क्या इन घोटालों की निष्पक्ष जांच होगी?

• क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?

• या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?

ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

अगर इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला पंचायत स्तर के सबसे बड़े घोटालों में से एक साबित हो सकता है।

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