
जीवन में मां का योगदान अविस्मरणीय : चंद्रलेखा बेलसरे
स्व. उर्मिलाताई कराड आदर्श माता पुरस्कार से कई महिलाओं का सम्मान
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे : “मां हमारे जीवन की पहली गुरु होती है। वह दिन-रात मेहनत कर अपने बच्चों के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देती है। अपने बच्चों के सुख और भविष्य के लिए वह स्वयं कष्ट सहती है। जीवनभर हम मां के लिए कितना भी करें, उसके उपकार कभी नहीं चुका सकते। मां का प्रेम, त्याग और संस्कार ही व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देते हैं।” यह विचार वरिष्ठ साहित्यिका Chandralekha Belsare ने व्यक्त किए।
अपेक्षा मासिक परिवार, पुणे की ओर से स्वर्गीय सौ. उर्मिलाताई कराड की जयंती के अवसर पर “स्व. सौ. उर्मिलाताई कराड आदर्श माता पुरस्कार” समारोह का आयोजन वेदशास्त्रोतेजक सभागृह में किया गया। इस अवसर पर “अपेक्षा मातृसेवा विशेषांक” का विमोचन किया गया तथा आमंत्रित कवियों का भव्य कवि सम्मेलन भी आयोजित हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे।
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेविका Devyanitai Vaidankar, मीनाताई सत्यशील नाईक, मायाताई प्रभुणे तथा रामहरी कराड-रुईकर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अपने संबोधन में मातृत्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज में महिलाओं और माताओं के योगदान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर सीताबाई नरके, सुनेत्रा गायकवाड़, श्रद्धा सिंदगीकर, निर्मला बाचल, प्रमिला विश्वे, स्नेहा मुसरीफ, मंजू महाबळेश्वरकर, वैदेही भोमे, सरिता बक्षी, ज्योती सिनफळ, रूपा करडखेडकर, मंगला कुमावत तथा प्राची देशपांडे को “स्व. सौ. उर्मिलाताई कराड आदर्श माता पुरस्कार” प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की ओर से श्रद्धा सिंदगीकर ने मनोगत व्यक्त करते हुए उर्मिलाताई कराड की स्मृतियों को साझा किया और उनके सामाजिक कार्यों को प्रेरणादायी बताया।
कवि सम्मेलन में अस्मिता मराठे, गणेश पुंडे, सीमा माने, ज्योती मनोहर, पुष्पा कुलकर्णी, अंजली महाजन तथा प्रकाश नाईक ने मां पर आधारित भावपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कीं। कविताओं में मां के प्रेम, ममता, संघर्ष और त्याग का भावपूर्ण चित्रण किया गया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना अपेक्षा मासिक के संपादक दत्तात्रय उभे ने रखी। उन्होंने संस्था की गतिविधियों तथा मातृशक्ति के सम्मान के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र सगर ने किया तथा अंत में उपस्थित सभी अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं और नागरिकों का आभार व्यक्त किया।


