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आर्य नागार्जुन संग्रहालय’ का रजत जयंती समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न

आर्य नागार्जुन संग्रहालय’ का रजत जयंती समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न

वर्तमान समय में दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध के विचारों की आवश्यकता – उपमहापौर परशुराम वाडेकर

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे : बौद्ध इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित ‘आर्य नागार्जुन संग्रहालय’ के रजत जयंती वर्ष का समारोह रविवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में संग्रहालय के 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पर प्रकाश डाला गया। साथ ही संग्रहालय के संरक्षण, संवर्धन और विस्तार में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।

 

बौद्ध इतिहास एवं संस्कृति अनुसंधान संस्था के अंतर्गत संचालित इस संग्रहालय की स्थापना 9 अप्रैल 2000 को हुई थी। पिछले 25 वर्षों में संग्रहालय ने सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इस अवसर पर संग्रहालय के संस्थापक एवं वरिष्ठ संग्राहक स्वर्गीय दिलीप लक्ष्मण वानखेडे द्वारा दुर्लभ और ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण कार्य को विशेष रूप से याद किया गया।

 

कार्यक्रम में पाली भाषा के वरिष्ठ विद्वान, लिपि विशेषज्ञ और गुफा संरक्षण विशेषज्ञ अतुल भोसेकर ने ‘बौद्ध संग्रहालय की वैश्विकता’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से बताया कि महान सम्राट अशोक ने भारत का पहला बौद्ध संग्रहालय किस प्रकार स्थापित किया था। संग्रहालयों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि “इतिहास और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में संग्रहालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर संग्रहालयों का भ्रमण कर वहां संरक्षित धरोहरों का अवलोकन करना चाहिए। जनसहभागिता से ही संग्रहालय जीवित रहते हैं।”

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पुणे महानगरपालिका के उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने संग्रहालय के 25 वर्षों के सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों की सराहना की। संग्रहालय के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “आज पूरी दुनिया युद्ध के भय से घिरी हुई है। ऐसे समय में भगवान गौतम बुद्ध के शांति, करुणा और भाईचारे के विचार ही मानवता को सही दिशा दे सकते हैं। वर्तमान समय में दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि बुद्ध के विचारों की आवश्यकता है।”

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र शासन के अवर सचिव बालासाहेब सावंत ने की। उन्होंने स्वर्गीय दिलीप वानखेडे के ऐतिहासिक संग्रह कार्य की सराहना करते हुए संग्रहालय की भावी प्रगति के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

कार्यक्रम का मार्गदर्शन वंदनीय भंते नाग दीपंकर महास्थवीर ने किया। उनके द्वारा बुद्ध वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। संग्रहालय की अध्यक्षा कल्पना दिलीप वानखेडे ने प्रस्तावना एवं आभार प्रदर्शन किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन दीपक मसके ने किया। कार्यक्रम का संयोजन कुलदीप वानखेडे एवं हर्षवर्धन वानखेडे ने किया।

 

इस अवसर पर स्त्रीभूषण रमाई आंबेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष विठ्ठलराव गायकवाड, पुणे महानगरपालिका के नगरसेवक निलेश आल्हाट, वसुंधरा भोसेकर सहित सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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