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पुणे में आंबेडकरी आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मुद्दों पर की विस्तृत चर्चा

पुणे में आंबेडकरी आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मुद्दों पर की विस्तृत चर्चा

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे : पुणे में आंबेडकरी आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ रिपब्लिकन आंदोलन, दलित पैंथर आंदोलन, महिला आंदोलन, किसान आंदोलन तथा वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर विस्तृत चर्चा आयोजित की गई। बैठक में आंदोलन के भविष्य, संगठनात्मक मजबूती और नई पीढ़ी की भूमिका पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।

 

इस चर्चा में वरिष्ठ मार्गदर्शक वसंतराव सालवे और चंद्रकांत काले, पुणे कैंटोनमेंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष रोहिदासजी गायकवाड़, सुधाकर कांबले, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के वरिष्ठ नेता असित गंगुर्डे, शैलेंद्र चव्हाण और सुनील भोसले, एडवोकेट करण जगताप, संतोष कांबले, वरिष्ठ कार्यकर्ता रावसाहेब झेंडे तथा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. विलास आढाव सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

बैठक में आंबेडकरी आंदोलन की वर्तमान स्थिति, संगठनात्मक चुनौतियों, सामाजिक बदलावों और युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा की गई। वरिष्ठ मार्गदर्शक वसंतराव सालवे ने कहा कि आंबेडकरी आंदोलन के पुनरुज्जीवन के लिए केवल आने-जाने वाले लोगों से काम नहीं चलेगा, बल्कि विचारों के प्रति समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की मजबूती के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठन के प्रति समर्पण जरूरी है।

 

पूर्व उपाध्यक्ष रोहिदास गायकवाड़ ने कहा कि दलित पैंथर आंदोलन का पुनर्परीक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के रचनात्मक, सकारात्मक और समाज परिवर्तनकारी कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। युवाओं को आंदोलन के इतिहास और उसके योगदान से परिचित कराना जरूरी है, ताकि वे उससे प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।

 

बैठक के समापन अवसर पर डॉ. विलास आढाव ने कहा कि भविष्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ एवं अनुभवी आंबेडकरी कार्यकर्ताओं को युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की वैचारिक विरासत का गंभीर चिंतन और मंथन कराया जाना आवश्यक है। इससे वैचारिक रूप से मजबूत, जागरूक और बुद्धिमान युवाओं की एक सशक्त पीढ़ी तैयार होगी, जो आंदोलन और समाज को नई दिशा दे सकेगी।

 

सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई यह चर्चा प्रतिभागियों के अनुसार अत्यंत प्रबोधनकारी, प्रेरणादायक और दिशादर्शक रही। बैठक में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने आंबेडकरी आंदोलन को मजबूत बनाने तथा युवा पीढ़ी को उससे जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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