
अनुसूचित जातियों का उपवर्गीकरण जातीय जनगणना के बाद ही हो : परशुराम वाडेकर
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे। अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण को लेकर चल रही चर्चा के बीच रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर कोई भी निर्णय राष्ट्रीय जातीय जनगणना पूरी होने और वास्तविक जनसंख्या के आंकड़े सामने आने के बाद ही लिया जाना चाहिए। पार्टी के नेता एवं पुणे के उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने कहा कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला समाज में आंतरिक विभाजन और तनाव पैदा कर सकता है।
पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में वाडेकर ने कहा कि अनुसूचित जातियों के विभिन्न समाजघटक वर्षों से सामाजिक न्याय और अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करते आए हैं। ऐसे में उपवर्गीकरण का कोई भी निर्णय ठोस और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उपवर्गीकरण किया जाता है तो वह पूरी तरह जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होना चाहिए।
पार्टी ने यह भी मांग की कि 2027 की जनगणना के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जाए, ताकि सभी समाजघटकों को समान अवसर और न्याय मिल सके।
इस अवसर पर पार्टी नेताओं ने केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले के बयान को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की आलोचना की। उनका कहना था कि इससे अनुसूचित समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास और टकराव का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी के प्रदेश सचिव बाळासाहेब जानराव ने बताया कि उपवर्गीकरण के मुद्दे पर बढ़ रहे तनाव को कम करने के लिए राज्यभर में ‘सलोखा परिषद’ आयोजित की जाएगी, जिससे विभिन्न समाजघटकों के बीच संवाद और सौहार्द को बढ़ावा मिल सके।



