
सरकार की प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने में बैंक पूरी प्रतिबद्धता दिखाएं — जिलाधिकारी
लघु उद्योग एवं उद्योग-धंधों के विस्तार पर जोर, बैंकर्स को स्पष्ट निर्देश
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:सीतामढ़ी बिहार
समाहरणालय स्थित विमर्श सभा कक्ष में आयोजित जिला परामर्शदात्री समिति, जिला स्तरीय समीक्षा समिति एवं जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय ने कहा कि जिले में उद्योग, लघु उद्योग, सेवा-आधारित उद्यम और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसके मद्देनज़र सभी बैंक अपनी भूमिका को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सीडी रेशियों(साख जमा अनुपात) मार्च 2026 में 60.69 प्रतिशत ,दिसंबर 2025 में 59.36 प्रतिशत, 1.33 की वृद्धि
राज्य का सीडी रेशियों–57.36,जिले का परफॉर्मेंस राज्य से बेहतर
जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में क्रेडिट–डेपॉजिट अनुपात (सीडी रेशियो) में दिसंबर की तुलना में वृद्धि सही है ,इसे और बढ़ाने की जरूरत है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (43.21%) और बैंक ऑफ बड़ौदा (46.51%), के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि उद्योग और रोजगार सृजन तभी गति पकड़ेंगे, जब बैंक ऋण प्रवाह को बढ़ाएं। उन्होंने सभी बैंकों को सीडी रेशियो में ठोस सुधार लाने का निर्देश दिया। बिहार ग्रामीण बैंक सीडी रेशियों 111.87 % रहा।
(लघु उद्योग एवं स्व-रोजगार योजनाओं पर विशेष जोर)
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन का फोकस उद्योग एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित कर युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है।
इस क्रम में उन्होंने बैंकों को निम्न निर्देश दिए—
पीएमएफएमई, पीएमईजीपी और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं के आवेदनों का शीघ्र निष्पादन
लंबित पीएमएफएमई आवेदन तुरंत निपटाए जाएं।
पीएमईजीपी के तहत जिला उद्योग केंद्र द्वारा भेजे गए आवेदनों को प्राथमिकता दी जाए ताकि युवाओं को स्वरोजगार मिल सके।
पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक उद्यमी जोड़ने और स्व–रोजगार उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।
(जिले में लघु उद्योगों का विस्तार बैंकिंग सहायता पर निर्भर – डीएम)
जिलाधिकारी ने कहा कि
सीतामढ़ी में खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, फिशरी, हस्तशिल्प और पारंपरिक कुटीर उद्योगों के लिए अपार संभावनाएँ हैं। साथ ही कई बृहत प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को लेकर कार्य चल रहे हैं। बैंक यदि समुचित वित्तीय सहायता दें, तो जिले में छोटे और मध्यम उद्योगों का तेज़ी से विकास संभव है।
उन्होंने निर्देश दिया कि बैंक अपनी शाखाओं में उद्योग योजना से जुड़े आवेदकों की काउंसलिंग, मार्गदर्शन और दस्तावेज़ी सहायता भी प्रदान करें।
फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं है ,ऐसे में बैंकों की अहम भूमिका से जिले में कृषि आधारित उद्योगों का विकास होगा और किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेंगे।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट एवं अन्य पर्यटन सेवाओं के लिए ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया सरल एवं त्वरित करें, जिससे पर्यटन अवसंरचना को बढ़ावा मिले। स्टार्टअप एवं स्वरोजगार योजनाओं के लाभुकों को समयबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन एवं अन्य संबद्ध क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाएं, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रवाह मिले।
स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं जीविका दीदियों को बैंकिंग सेवाओं और ऋण सुविधाओं से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाएं, जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिले।
बैंक शाखाएं लंबित ऋण आवेदनों का शीघ्र निष्पादन करें तथा योग्य आवेदकों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने हेतु दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करें तथा डिजिटल बैंकिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।
जिले में चल रही विकास परियोजनाओं एवं निवेश संभावनाओं के अनुरूप बैंक निवेशकों और उद्यमियों को आवश्यक वित्तीय सहयोग प्रदान करें, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हो।
(नीलाम पत्रवाद व पंजी-9/10 के अनुपालन में ढिलाई नहीं)
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी बैंक—
प्रत्येक माह नीलाम पत्र कार्यालय जाकर पंजी–9 व 10 का मिलान करें,तथा प्रखंड और अनुमंडल स्तर पर भी समय पर मिलान सुनिश्चित करें।
बैठक में एलडीएम अनिल कुमार सिंह, डीपीआरओ कमल सिंह, बैंकिंग प्रभारी अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव, जीएम–डीआईसी प्रिया भारती, रिज़र्व बैंक के प्रतिनिधि समेत सभी प्रमुख बैंकों के अधिकारी उपस्थित थे।



