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विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी अभियान (ग्रामीण) योजना का जिला स्तरीय शुभारंभ

विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी अभियान (ग्रामीण) योजना का जिला स्तरीय शुभारंभ

 

योजना का जिले में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें – अपर जिलाधिकारी सतीश राऊत

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:  पुणे महाराष्ट्र 

पुणे,। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी अभियान (ग्रामीण) [वीबी-जीरामजी] योजना के तहत अधिक से अधिक रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया जाए। साथ ही जिले के जनप्रतिनिधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग करें। यह अपील अपर जिलाधिकारी सतीश राऊत ने की।

 

वे जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित वीबी-जीरामजी योजना के जिला स्तरीय शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य शांताराम इंगवले, मुलशी पंचायत समिति सदस्य प्राजंल मोरे, उपजिलाधिकारी डॉ. चारुशीला मोहिते-देशमुख, समूह विकास अधिकारी मोहन मोहिते, ग्रामवासी, स्वयं सहायता समूहों के सदस्य एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

सतीश राऊत ने कहा कि महाराष्ट्र देश को दिशा देने वाला राज्य माना जाता है। राज्य में संचालित रोजगार गारंटी योजना को समय के साथ राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए इसमें आवश्यक बदलाव किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराना, टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा विकसित भारत के लक्ष्य को गति देना है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, इसलिए योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता आवश्यक है।

 

उपजिलाधिकारी डॉ. चारुशीला मोहिते-देशमुख ने बताया कि मनरेगा के प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित क्रियान्वयन के लिए सरकार ने नई वीबी-जीरामजी योजना शुरू की है। इसके माध्यम से वार्षिक कार्ययोजना तैयार करना, कार्यों को प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति देना, ऑनलाइन प्रबंधन, लाभार्थी एवं परिसंपत्ति पंजीकरण, भौगोलिक सूचना, वित्तीय लेन-देन की निगरानी तथा विभिन्न रिपोर्टों का डिजिटल प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक सरल हो गया है। इससे ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर कार्य अधिक तेज, सटीक, पारदर्शी और जवाबदेह बनेंगे।

 

उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। पहले योजना में 266 प्रकार के कार्य शामिल थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 318 प्रकार कर दिया गया है। योजना के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार देने के साथ-साथ जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, वृक्षारोपण, ग्रामीण आधारभूत संरचना का विकास, प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन तथा ग्राम विकास से जुड़े विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पलायन कम होगा और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

 

कार्यक्रम के दौरान 100 दिनों का रोजगार पूरा करने वाले श्रमिकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

 

इस अवसर पर विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी अभियान (ग्रामीण) योजना की विस्तृत जानकारी पावर प्वाइंट प्रस्तुति (पीपीटी) के माध्यम से भी दी गई।

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