
बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी: डीएम
नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई, चिकित्सालयों में वैज्ञानिक निस्तारण के दिए निर्देश
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: इटावा, उत्तर प्रदेश
इटावा। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में विकास भवन स्थित प्रेरणा सभागार में राजकीय एवं निजी चिकित्सालयों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बायोमेडिकल वेस्ट के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन एवं निस्तारण की मानक प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निस्तारण जनस्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी चिकित्सालयों में कचरे का स्रोत पर ही निर्धारित मानकों के अनुसार पृथक्करण किया जाए तथा किसी भी स्थिति में बायोमेडिकल वेस्ट खुले में न फेंका जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित चिकित्सालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कार्यशाला में मेसर्स ग्रीन हाउस वेस्ट मैनेजमेंट, मैनपुरी के श्री जितेन्द्र शर्मा ने रंग-कोड आधारित डस्टबिनों के माध्यम से बायोमेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संक्रमित प्लास्टिक, मानव ऊतक, कांच सामग्री एवं धारदार उपकरणों के लिए अलग-अलग रंग के डस्टबिन निर्धारित हैं, जबकि सामान्य कचरे के लिए काले रंग के डस्टबिन का उपयोग किया जाना चाहिए।
डीएम ने प्रत्येक चिकित्सालय में अस्थायी बायोमेडिकल वेस्ट स्टोरेज एरिया विकसित करने, प्रतिदिन उठने वाले वेस्ट का लॉग बुक में रिकॉर्ड रखने तथा अधिकृत एजेंसी ग्रीन हाउस वेस्ट मैनेजमेंट को ही बायोमेडिकल वेस्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
कार्यशाला में जिला परिवार नियोजन एवं लॉजिस्टिक प्रबंधन अधिकारी अमित विश्वकर्मा ने 11 से 18 जुलाई तक आयोजित होने वाले विश्व जनसंख्या पखवाड़ा की जानकारी भी दी। इस दौरान सीएमएस, नोडल अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, राजकीय चिकित्सालयों के प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


