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स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुधार एवं नियमित मॉनिटरिंग पर जोर, जिला पदाधिकारी ने विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों की विस्तृत समीक्षा की

स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुधार एवं नियमित मॉनिटरिंग पर जोर, जिला पदाधिकारी ने विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों की विस्तृत समीक्षा की

 

जून माह में संस्थागत प्रसव के क्षेत्र में सीतामढ़ी का पूरे बिहार में 7वां स्थान

रिपोर्ट ;विशाल समाचार 

स्थान:सीतामढ़ी बिहार 

जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय की अध्यक्षता में परिचर्चा भवन, सीतामढ़ी में जिले के विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं प्रमुख स्वास्थ्य सूचकांकों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति तथा विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति का मूल्यांकन करना था।

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव, डीपीआरओ कमल सिंह, सीडीओ डॉ. जेड. जावेद, डीआईओ मुकेश कुमार, जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम असित रंजन, डीपीसी दिनेश कुमार, आरबीएसके जिला समन्वयक प्रतीक यादव, डीएम एंड ई संतोष कुमार, पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, दुर्गा प्रसाद एवं बिकेश कुमार, पीएसआई (इंडिया) के विनय कुमार, वाधवानी एआई के राकेश कुमार सहित जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सभी प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक एवं सभी प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान राज्य सरकार के निर्देशानुसार टीबी उन्मूलन अभियान की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान टीबी रोगियों की समय पर पहचान, जांच, उपचार, उपचार की सफलता दर तथा निक्षय पोषण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि टीबी मुक्त सीतामढ़ी के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक स्तर पर सतत निगरानी एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाएं।

इसके अतिरिक्त 11 से 31 जुलाई तक चल रहे जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के अंतर्गत परिवार नियोजन सेवाओं की उपलब्धता, योग्य दंपत्तियों की काउंसलिंग एवं विभिन्न गर्भनिरोधक साधनों की पहुंच की समीक्षा की गई। साथ ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत गर्भवती महिलाओं की गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान तथा समय पर रेफरल की स्थिति का भी मूल्यांकन किया गया।

बैठक में संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण, सी-सेक्शन सेवाएं, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, 102 एवं 108 एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता एवं रिस्पॉन्स टाइम, एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) की तैयारियों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। विभिन्न प्रखंडों के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

 

जिला पदाधिकारी ने जिले की हालिया उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। जून माह में संस्थागत प्रसव के क्षेत्र में सीतामढ़ी ने पूरे बिहार में 7वां स्थान प्राप्त किया है, वहीं जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) में जिला राज्य में दूसरे स्थान पर रहा है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों को बनाए रखते हुए अन्य स्वास्थ्य सूचकांकों में भी निरंतर सुधार लाना सभी अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जिला पदाधिकारी ने कार्य में लगातार लापरवाही बरतने वाले बोखरा प्रखंड के बीएचएम के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया। वहीं बैरगनिया, बोखरा, रीगा, बाजपट्टी, परिहार, डुमरा एवं रुन्नीसैदपुर प्रखंडों में लगातार कम संस्थागत प्रसव होने पर संबंधित प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरकों (BCM) का वेतन स्थगित करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया।

इसके साथ ही जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव को निर्देश दिया कि जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए Jio Tag Location के माध्यम से उनकी उपस्थिति का सत्यापन कराया जाए। उन्होंने कहा कि सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रूप से उपस्थित रहकर स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी निगरानी करें तथा चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित करें।

अपने संबोधन में जिला पदाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रत्येक सप्ताह निर्धारित स्वास्थ्य सूचकांकों की समीक्षा करें तथा जिन क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रभावी मॉनिटरिंग, डेटा की गुणवत्ता एवं समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

बैठक के अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में निरंतर सुधार लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से ही जिले को राज्य के अग्रणी जिलों में स्थापित किया जा सकता है।

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