
एसीएमए मोबिलिटी फाउंडेशन की पहली क्लस्टर कॉन्फ्रेंस में भारत की ऑटोमोबाइल विनिर्माण क्षमता का केंद्र बना पुणे
उद्योग जगत के नेताओं ने विश्वस्तरीय ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन के लिए सहयोग और क्षमता विकास पर दिया जोर
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : एसीएमए मोबिलिटी फाउंडेशन ने आज “विश्वस्तरीय ऑटोमोटिव सप्लाई चेन का निर्माण – द एसीएमए वे” विषय पर क्लस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 का पहला आयोजन किया। इस अवसर पर एसीएमए क्लस्टर मूवमेंट के 25 वर्ष पूरे होने का भी जश्न मनाया गया। यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने भारत के ऑटोमोबाइल कंपोनेंट उद्योग में परिचालन दक्षता को मजबूत करने, आपसी सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर सहयोग, नवाचार और लगातार सुधार के माध्यम से मजबूत तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन तैयार करने के तरीकों पर चर्चा की।
भारत के “डेट्रॉइट ऑफ द ईस्ट” के रूप में पहचाने जाने वाले पुणे में इस सम्मेलन का आयोजन, देश के ऑटोमोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में शहर की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। 4,000 से अधिक ऑटोमोबाइल और सहायक उद्योग इकाइयों वाले पुणे ने समय के साथ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, आधुनिक विनिर्माण और साझा क्षमता विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तकनीक में तेज़ी से हो रहे विकास, विश्वस्तरीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) और परीक्षण सुविधाओं के साथ-साथ इंडस्ट्री 4.0 आधारित विनिर्माण को अपनाकर पुणे भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बदलाव को नई दिशा दे रहा है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में यह शहर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसीएमए के अध्यक्ष और जे.के. फेनर (इंडिया) लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री विक्रमपति सिंघानिया ने कहा, “पच्चीस वर्ष पहले एसीएमए ने एक सरल लेकिन बदलाव लाने वाला फैसला लिया था। कंपनियों को एक-दूसरे से बेहतर बनने के लिए प्रेरित करने के बजाय, हमने उन्हें एक-दूसरे के साथ मिलकर बेहतर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी सोच से एसीएमए क्लस्टर मूवमेंट की शुरुआत हुई, जो समय के साथ सहयोग, बेहतर कार्यप्रणालियों से सीखने और लगातार सुधार की मजबूत संस्कृति के रूप में विकसित हुआ है।
उद्योग की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025–26 में भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग का कारोबार 7.6 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जबकि निर्यात 24 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। पिछले पाँच वर्षों में इस उद्योग का आकार दोगुने से भी अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र पर दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। लेकिन इस बढ़त और नेतृत्व को बनाए रखने के लिए इंजीनियरिंग, बेहतर विनिर्माण, गुणवत्ता, नवाचार और लोगों के कौशल के विकास में लगातार निवेश करना जरूरी होगा। उन्होंने कहा, “सिर्फ बड़ा आकार होने से बाज़ार मिल सकता है, लेकिन भरोसा मजबूत क्षमता से ही जीता जाता है। आने वाला समय सबसे बड़ी कंपनियों का नहीं, बल्कि ऐसे मजबूत उद्योग तंत्र का होगा जो मिलकर आगे बढ़ने और लगातार बेहतर बनने की क्षमता रखते हों।”
प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए एसीएमए के अध्यक्ष-नामित और ब्रेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री श्रीराम विजी ने कहा, “जैसे-जैसे भारत वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे विश्वस्तरीय सप्लाई चेन तैयार करने के लिए उद्योग, सरकार और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग की आवश्यकता होगी। एसीएमए क्लस्टर मूवमेंट विशेष रूप से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को गुणवत्ता, डिजिटलीकरण और लगातार क्षमता विकास के माध्यम से अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सम्मेलन में भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं प्रौद्योगिकी) श्री विनम्र मिश्रा ने मुख्य वक्तव्य दिया। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन के भविष्य पर एक विशेष परिचर्चा भी आयोजित की गई। इस चर्चा में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वीई कमर्शियल व्हीकल्स, जेएसडब्ल्यू मोटर्स, टीवीएस मोटर कंपनी और कमिंस इंडिया के खरीद (प्रोक्योरमेंट) और रणनीति से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए।
भारत सरकार के एमएसएमई (लघु, छोटे और मध्यम उद्यम) मंत्रालय के संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं प्रौद्योगिकी) श्री विनम्र मिश्रा ने कहा, “एमएसएमई मंत्रालय, ज़ेड (ZED) और लीन कार्यक्रमों को और बेहतर बना रहा है। इसके तहत तकनीक को बेहतर बनाने, गुणवत्ता प्रमाणन, बाज़ार तक पहुंच, सरकारी खरीद और विदेशों में कारोबार बढ़ाने के लिए ज्यादा प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे विनिर्माण क्षेत्र के लघु, छोटे और मध्यम उद्यम अधिक सक्षम बनेंगे और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि मजबूत ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ सशक्त लघु, छोटे और मध्यम उद्यमों का क्षेत्र, ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने और भारत को दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।”
रजत जयंती समारोह के तहत एसीएमए ने क्लस्टर मूवमेंट के 25 वर्षों के सफर पर आधारित एक स्मारक फिल्म जारी की। इस अवसर पर IMPACT का विशेष संस्करण भी लॉन्च किया गया। साथ ही, विनिर्माण क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन और लगातार सुधार के लिए क्लस्टर स्टार परफॉर्मर कंपनियों को सम्मानित किया गया।
सम्मेलन के समापन पर एसीएमए के महानिदेशक श्री विनी मेहता ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत का ऑटो कंपोनेंट उद्योग मजबूत और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। इसकी बड़ी वजह घरेलू बाजार की मजबूत मांग, तकनीक में लगातार निवेश और वैश्विक ग्राहकों का बढ़ता भरोसा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव हो रहा है, भारत एक भरोसेमंद विनिर्माण भागीदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। एसीएमए क्लस्टर मूवमेंट लगातार यह दिखा रहा है कि आपसी सहयोग और क्षमता विकास पर निरंतर काम करना ही प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने और विश्वस्तरीय ऑटोमोबाइल सप्लाई चे
न तैयार करने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।”
पिछले 25 वर्षों में एसीएमए क्लस्टर मूवमेंट ने हजारों विनिर्माण पेशेवरों और 2,500 से अधिक विनिर्माण इकाइयों को वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ अपनाने में सहयोग दिया है। यह पहल भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन तैयार करने के प्रति एसीएमए की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

