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अनिवार्य E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ ‘टीम भारत’ का देशव्यापी ‘3S’ आंदोलन

अनिवार्य E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ ‘टीम भारत’ का देशव्यापी ‘3S’ आंदोलन

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:पुणे,महाराष्ट्र 

पुणे,: केंद्र सरकार द्वारा E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य किए जाने की नीति के खिलाफ ‘टीम भारत’ ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने इस नीति को ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’ बताते हुए आंदोलन के अगले चरण के रूप में ‘सड़क, संसद और सुप्रीम कोर्ट’ का ऐलान किया है।

पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तहसीन पूनावाला और उनके सहयोगियों ने कहा कि E20 नीति के उपभोक्ताओं, किसानों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस दौरान दिनेश तांतिया, विशाल जैन, नचिकेत देशपांडे और शंकर रामन भी मौजूद थे।

‘टीम भारत’ के मुताबिक, आंदोलन के पहले चरण ‘सड़क’ के तहत देशभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और नागरिकों से सीधे संवाद किया जाएगा। ‘संसद’ के माध्यम से आगामी मानसून सत्र में सांसदों के समक्ष यह मुद्दा उठाने का प्रयास होगा, जबकि ‘सुप्रीम कोर्ट’ के माध्यम से उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।

संगठन ने दावा किया कि भारत की सड़कों पर चलने वाले 80 प्रतिशत से अधिक वाहन E10 ईंधन के अनुरूप बनाए गए हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार दिए बिना E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

तहसीन पूनावाला ने आरोप लगाया कि इथेनॉल नीति का लाभ कुछ चुनिंदा डिस्टिलरी मालिकों को मिला है, जबकि उपभोक्ताओं और किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि इथेनॉल मिश्रण से विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है।

पूनावाला ने कहा कि एक ओर भारत ईंधन का आयात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खाद्य फसलों और कृषि उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने के साथ-साथ खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी है।

‘टीम भारत’ ने आरोप लगाया कि E20 नीति से संबंधित तकनीकी अध्ययन, परीक्षण रिपोर्ट, पर्यावरणीय आकलन, स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन और आर्थिक विश्लेषण सरकार ने अब तक सार्वजनिक नहीं किया है। संगठन ने इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से उत्सर्जन, वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित सभी वैज्ञानिक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की।

संगठन ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें E10 अनुकूल वाहनों के लिए E10 पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखना, उपभोक्ताओं को वास्तविक विकल्प देने के लिए E0 पेट्रोल की कीमत कम करना और E20 पेट्रोल की कीमत में इथेनॉल की मात्रा के अनुपात में 20 प्रतिशत की छूट देना शामिल है।

नितिन गडकरी की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग

तहसीन पूनावाला ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इथेनॉल नीति के समर्थन के पीछे कथित ‘संदिग्ध हितों’ की स्वतंत्र जांच की मांग भी की।

हालांकि, ‘टीम भारत’ ने स्पष्ट किया कि वह इथेनॉल या नवीकरणीय ईंधनों के खिलाफ नहीं है। संगठन ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों का वह समर्थन करता है। लेकिन किसी भी नीति का निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों, पारदर्शिता, उपभोक्ताओं की पसंद और व्यापक सार्वजनिक चर्चा के आधार पर ही लिया जाना चाहिए.

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