
साइबर सुरक्षा तकनीक का ज्ञान समय की जरूरत : डॉ. पराग कालकर
सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में ‘इन्वेस्टिगेशन मास्टरक्लास’ कार्यशाला का शुभारंभ, साइबर अपराधों से बचाव पर विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे। आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा तकनीक की जानकारी और शिक्षा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। बदलते अपराधों के स्वरूप को देखते हुए जांच एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना जरूरी है। यह बात सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्र-कुलपति प्रो. डॉ. पराग कालकर ने कही।
ट्रान्सेडेंटल टेक्नोलॉजीज, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी विभाग, पुनीत बालन ग्रुप और न्यूलिफ लाइफ स्पेसेस के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग में आयोजित ‘इन्वेस्टिगेशन मास्टरक्लास’ साइबर सुरक्षा कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर डॉ. कालकर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में जीएसटी विभाग की अपर महानिदेशक (एडीजी, डीजीजीआई) वृंदाबा गोहिल, पुणे एटीएस के एसपी संभाजी कदम, डॉ. आरती दातार, माधुरी सातपुते, लीना सातपुते, प्राजक्ता गिरी तथा ट्रान्सेडेंटल टेक्नोलॉजीज के प्रमुख केतन अत्रे सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
डॉ. कालकर ने कहा कि आज बैंकिंग, यात्रा, संचार और दैनिक जीवन से जुड़ी अधिकांश जानकारी मोबाइल फोन में संग्रहीत रहती है। साइबर अपराधी इसी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचने का पहला कदम तकनीक की सही जानकारी और जागरूकता है। यदि आम नागरिक मोबाइल और डिजिटल तकनीक का सुरक्षित उपयोग करना सीख लें, तो साइबर अपराधों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
जीएसटी विभाग की अपर महानिदेशक वृंदाबा गोहिल ने कहा कि साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए विश्वविद्यालय और ट्रान्सेडेंटल टेक्नोलॉजीज का यह संयुक्त प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहिए।
डॉ. आरती दातार ने बताया कि साइबर सुरक्षा पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण आधारित यह कार्यशाला अपने प्रकार की देश की शुरुआती पहल में से एक है और प्रतिभागियों को इसका अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।
कार्यशाला में वक्ता कुंदन कुमार सराफ ने मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करते समय सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी वेबसाइट या ऐप पर व्यक्तिगत एवं गोपनीय जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच अवश्य करनी चाहिए, ताकि साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सके।


