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भारत की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी टीवीएस वीएमएस ने मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक के साथ साझेदारी की, देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव

भारत की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी टीवीएस वीएमएस ने मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक के साथ साझेदारी की, देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव

~200 से अधिक वर्षों के संयुक्त अनुभव वाले विरासत समूहों से जुड़ी दोनों कंपनियां स्वच्छ और बेहतर भारत के निर्माण के लिए साथ आईं~

~वित्त वर्ष 2026-27 में 300 से अधिक इलेक्ट्रिक ट्रकों को तैनात करने का लक्ष्य~

रिपोर्ट ;विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे — भारत के इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल क्षेत्र में व्यापक उत्पाद पेश करने वाले ब्रांड मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक (eM & HCV डिवीजन) ने आज टीवीएस मोबिलिटी ग्रुप की कंपनी टीवीएस व्हीकल मोबिलिटी सॉल्यूशंस (TVS VMS) के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।

टीवीएस वीएमएस ने पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रकिंग के क्षेत्र में कदम रखा है। कंपनी ने मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक के राइनो e-M&HCV ट्रकों के अपने पहले बेड़े को वास्तविक माल ढुलाई संचालन में लगाने का फैसला किया है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीवीएस पिछले सात दशकों से अधिक समय से कमर्शियल ट्रकिंग के क्षेत्र में पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से चलने वाले ट्रकों का संचालन करती रही है।

इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत के मौके पर आज मानेसर में मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक के 57 राइनो 5538 EV 4×2 TT इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक ट्रक मौजूद रहे। तैनाती के पहले चरण में टीवीएस वीएमएस इन राइनो eHCV ट्रकों का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स रूट पर व्यावसायिक माल ढुलाई के लिए करेगी। ये ट्रक 190 किलोमीटर की दूरी वाले रूट पर चलेंगे। लगातार संचालन और बिना रुकावट सेवा सुनिश्चित करने के लिए इस मार्ग पर रणनीतिक रूप से तीन समर्पित चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं।

यह कदम दरअसल भारत में हरित परिवहन की दिशा में बदलाव का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा सकता है। इससे कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी, डीजल की खपत घटेगी और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना को इस तरह तैयार किया गया है कि माल ढुलाई करने वाले ग्राहकों की परिचालन लागत और कुल स्वामित्व लागत (TCO) कम हो। साथ ही यह भारत के नेट-जीरो कार्बन और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में भी योगदान देगा।

फ्लैग-ऑफ समारोह में दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिससे इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व का पता चलता है। मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक की ओर से eM & HCV डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नवनीत सेठी और मुख्य व्यवसाय अधिकारी (CBO) पी.वी. सत्यनारायण सहित कंपनी की टीम मौजूद रही। वहीं टीवीएस व्हीकल मोबिलिटी सॉल्यूशंस की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मधु रघुनाथ और EV बिजनेस के प्रमुख के. रमेश सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

साझेदारी पर मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक जलज गुप्ता ने कहा, “सात दशकों के अनुभव वाली टीवीएस वीएमएस जैसी कंपनी का हमारे इलेक्ट्रिक ट्रकों को वास्तविक माल ढुलाई संचालन में उतारना वही भरोसा है, जिसकी भारत के लॉजिस्टिक्स उद्योग को जरूरत थी। यह साबित करता है कि हमारी तकनीक व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल के लिए तैयार है। यह उस काम की मजबूती को भी दर्शाता है, जो हमने मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक में किया है। हमारे उत्पाद इस बाजार की खास परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

हमारी टीम ने टीवीएस वीएमएस के साथ मिलकर संचालन की योजना बनाई, उनके निर्धारित रूट के हिसाब से चार्जिंग की व्यवस्था की और हमारा टेलीमैटिक्स प्लेटफॉर्म ट्रकों के चलते रहने के दौरान उनके प्रदर्शन को लगातार बेहतर बना रहा है। यही फर्क है ऐसे ट्रक में, जो केवल कागज पर काम करता है और ऐसे पूरे बेड़े में, जो वास्तव में सड़क पर बेहतर प्रदर्शन करता है।”

 

मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक (eM & HCV डिवीजन) के सीईओ नवनीत सेठी ने कहा, “कई वर्षों से स्टील जैसे भारी और लगातार माल ढुलाई वाले उद्योग यह सवाल उठाते रहे हैं कि क्या इलेक्ट्रिक HCV वास्तव में भारी वजन के साथ लगातार माल ढुलाई का काम कर सकते हैं। इस संदेह के कारण इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति धीमी रही है। टीवीएस वीएमएस द्वारा हमारे राइनो ट्रकों को वास्तविक संचालन में उतारना इस सवाल का स्पष्ट जवाब है। यह हमारे लिए ही नहीं, बल्कि भारी माल ढुलाई वाले उन सभी उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो इस बदलाव पर नजर रख रहे हैं। सात दशकों से अधिक समय से पारंपरिक ट्रकों का संचालन करने वाली कंपनी अब पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रकिंग में प्रवेश कर रही है और इसके लिए उसने मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक को चुना है। यह इस बात की पुष्टि है कि हमारा प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर व्यावसायिक माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक के लिए यह इस बात का संकेत है कि भारत में इलेक्ट्रिक हेवी ट्रकिंग अब केवल एक संभावना नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे सामान्य परिचालन व्यवस्था का हिस्सा बन रही है। हम राष्ट्रीय स्तर पर इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

टीवीएस वीएमएस के सीईओ मधु रघुनाथ ने कहा, “यह रणनीतिक साझेदारी भारत के हरित लॉजिस्टिक्स ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। टीवीएस व्हीकल मोबिलिटी सॉल्यूशंस को इस बदलाव में योगदान देने पर गर्व है। हमारा पूर्ण और एंड-टू-एंड लाइफसाइकिल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म वाहन लीजिंग, ड्राइवर संचालन, रखरखाव, बीमा, चार्जिंग इकोसिस्टम और कनेक्टेड टेलीमैटिक्स को एक साथ जोड़ता है। इससे शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों के बेड़े का संचालन आसान और व्यावसायिक रूप से लाभदायक बनाया जा सकता है।”

इस सफल साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक और टीवीएस वीएमएस का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 300 से अधिक इलेक्ट्रिक ट्रकों को तैनात करना है। दोनों कंपनियां स्वच्छ और टिकाऊ मोबिलिटी समाधानों के माध्यम से कमर्शियल परिवहन क्षेत्र में बदलाव लाने की साझा सोच के साथ आगे बढ़ रही हैं।

मोन्ट्रा राइनो 5538 EV 4×2 TT का निर्माण मानेसर स्थित मोन्ट्रा इलेक्ट्रिक (IPLTech Electric Pvt. Ltd.) प्लांट में किया जाता है। यह 55 टन ग्रॉस कंबाइंड वेट (GCW) वाला इलेक्ट्रिक हेवी-ड्यूटी ट्रक है। यह ट्रैक्टर-ट्रेलर ट्रक है, जिसे लंबी दूरी तक भारी माल ढुलाई जैसे कठिन कामों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

इस ट्रक में 282 kWh की लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी लगी है, जिसे परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM) से जोड़ा गया है। यह मोटर अधिकतम 280 kW की शक्ति और 2,000 Nm का टॉर्क देती है। ट्रक में 18% ग्रेडेबिलिटी यानी चढ़ाई पर चलने की क्षमता और 6-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) दिया गया है, जिससे यह लगातार भारी वजन ढोने में सक्षम है।

ट्रक को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक तरफ लोड और दूसरी तरफ खाली चलने वाले ड्यूटी साइकिल में एक बार चार्ज करने पर 198 किलोमीटर तक की टेस्टेड रेंज मिलती है।

यह ट्रक दो विकल्पों में उपलब्ध है। पहला सामान्य फिक्स्ड-बैटरी मॉडल है, जिसे करीब 60 मिनट में 20% से 100% स्टेट ऑफ हेल्थ (SOH) तक फास्ट चार्ज किया जा सकता है। दूसरा बैटरी-स्वैप मॉडल है, जिसमें पूरी बैटरी को 6 मिनट से भी कम समय में बदला जा सकता है। इससे ऐसे व्यस्त रूट पर ट्रक के रुकने का समय कम होता है, जहां वाहनों का लगातार अधिक उपयोग किया जाता है।

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