अब शराब और गैर-अल्कोहलिक पेय पदार्थों पर भी FDA की नजर, तुकाराम मुंढे ने दी सख्त चेतावनी
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा; युवाओं को दिया ‘बी योरसेल्फ’ का मंत्र
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे। खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ अब अल्कोहलिक और नॉन-अल्कोहलिक पेय पदार्थों की गुणवत्ता पर भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कड़ी नजर रहेगी। FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि पेय पदार्थों की गुणवत्ता, उत्पादन और लेबलिंग की बारीकी से जांच की जाएगी। खानपान की गुणवत्ता के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुंढे शनिवार को बालगंधर्व रंगमंदिर में आयोजित ‘भविष्यवेध- संवाद भविष्याचा’ कार्यक्रम के तहत ‘अनस्टॉपेबल तुकाराम’ विशेष संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव, यूपीएससी की तैयारी, कठिन परिस्थितियों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की।
मिलावट और जहरीली शराब पर सख्ती
तुकाराम मुंढे ने कहा कि खाद्य पदार्थों की तरह ही शराब और गैर-अल्कोहलिक पेय पदार्थों में भी मिलावट की शिकायतें सामने आ रही हैं। गांवठी शराब में जहरीले रसायन मिलाए जाने से मौत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि FDA पेयजल और पेय पदार्थों की गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया तथा लेबलिंग पर विशेष नजर रखेगा।
उन्होंने कहा कि दूध, पनीर और खाद्य तेलों की तरह ही अल्कोहलिक एवं नॉन-अल्कोहलिक पेय पदार्थों की भी जांच की जाएगी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुंढे ने कहा कि मिलावटी भोजन, जहरीली ताड़ी-शराब और घटिया खाद्य पदार्थ नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। FDA की ओर से शिकायतों के लिए टोल-फ्री सुविधा शुरू की गई है और नागरिकों से मिलावट के खिलाफ जागरूक रहने की अपील की गई है।
युवाओं को दिया ‘बी योरसेल्फ’ का मंत्र
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए तुकाराम मुंढे ने कहा कि प्रत्येक युवा को अपने सपनों, विवेक और अंतरात्मा का अनुसरण करना चाहिए। केवल भीड़ के साथ बहने के बजाय समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता के साथ-साथ असफलताओं से भी सीखें। किसी का अंधानुकरण न करें, बल्कि हर व्यक्ति से अच्छी बातें सीखकर अपनी अलग पहचान बनाएं।
उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताते हुए युवाओं से केवल रील्स स्क्रॉल करने के बजाय सोचने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
‘बार-बार तबादलों से मुझे परेशानी नहीं’
अपने तबादलों को लेकर पूछे गए सवाल पर मुंढे ने कहा कि उन्हें बार-बार होने वाले तबादलों से कोई परेशानी नहीं होती। उनके अनुसार, बदलाव प्रगति का अभिन्न हिस्सा है और जितने अधिक तबादले होंगे, उतने अधिक सकारात्मक बदलाव करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यवस्था है। व्यवस्था को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। अधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन व्यवस्था को बेहतर तरीके से चलाने के लिए जवाबदेही और कार्यप्रणाली की संस्कृति विकसित करना जरूरी है।
कार्यक्रम में लेखक अरविंद जगताप, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत आहेर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मुंढे ने अपने बचपन, यूपीएससी की तैयारी, संघर्ष और प्रशासनिक सेवा के अनुभवों से जुड़े कई रोचक प्रसंग भी साझा किए।


