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देश को विश्वगुरु बनाना है तो वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत

देश को विश्वगुरु बनाना है तो वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत.

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

खामगांव की पारधी-आदिवासी आश्रमशाला में पुणे के अमनोरा YES फाउंडेशन ने बनवाए तीन भव्य अत्याधुनिक खेल परिसर

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

खामगांव/ पुणे : आज देशभर में जिन्हें हम घुमंतू-विमुक्त समाज के रूप में जानते हैं, वह समाज कभी ज्ञान और विद्या से समृद्ध समाज था। यह समाज अपना ज्ञान निःस्वार्थ भाव से समाज के बीच बांटने के लिए घर से बाहर निकला और समय के साथ भटकता हुआ वंचित समाज बन गया। ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण पूरे पारधी-आदिवासी समाज पर ‘अपराधी जनजाति’ का कलंक लगा दिया गया, जिसके कारण यह समाज लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से पीछे रह गया।

लेकिन श्री सद्गुरु धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट की इस आश्रमशाला में अमनोरा YES फाउंडेशन के सहयोग से पारधी समाज के बच्चों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। यह देखकर मुझे अत्यंत आनंद और आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है। यदि भारत को वास्तविक अर्थों में विश्वगुरु बनाना है, तो समाज के ऐसे वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना अत्यंत आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने किया।

खामगांव में स्वर्गीय भय्यूजी महाराज की प्रेरणा एवं पहल से प्रारंभ की गई पारधी-आदिवासी आश्रमशाला में अमनोरा YES फाउंडेशन के सहयोग से निर्मित तीन अत्याधुनिक खेल परिसरों तथा विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन शुक्रवार, 8 अगस्त को डॉ. मोहन भागवत के हाथों किया गया। इस अवसर पर वे संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में राज्य के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके, कामगार मंत्री आकाश फुंडकर, सिटी कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिरुद्ध देशपांडे, श्री सद्गुरु धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट, इंदौर की विश्वस्त डॉ. आयुषी देशमुख सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

अत्याधुनिक सुविधाओं का किया निरीक्षण

कार्यक्रम से पूर्व डॉ. मोहन भागवत ने अमनोरा YES फाउंडेशन के सहयोग से आश्रमशाला में किए गए विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए अत्याधुनिक खेल मैदानों, भोजनशाला, विद्यार्थियों द्वारा विकसित परसबाग तथा छात्रावास का अवलोकन किया। आश्रमशाला के विद्यार्थियों ने डॉ. मोहन भागवत का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

पारधी समाज ने कभी गुलामी स्वीकार नहीं की : भागवत

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि एक समय भारत का समाज पूर्णतः संगठित था। विदेशी आक्रमणों के कारण समाज गुलाम होता गया और धीरे-धीरे सामाजिक विघटन बढ़ता गया। इसी प्रक्रिया में समाज के अनेक वर्ग वंचित होते चले गए।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद समाज के वंचित वर्गों ने कभी परतंत्रता को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए निरंतर संघर्ष किया। अंग्रेजों के शासनकाल में पारधी एवं आदिवासी समाज को ‘अपराधी’ घोषित कर दिया गया, जिसके कारण उनके विकास की गति रुक गई।

उन्होंने कहा कि पारधी समाज के विकास के लिए संघ लंबे समय से प्रयासरत है। इसी क्रम में स्वर्गीय भय्यूजी महाराज ने इस आश्रमशाला की स्थापना का महत्वपूर्ण कार्य किया। अब इस विद्यालय को नया स्वरूप देने और यहां के विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य अमनोरा YES फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। यह प्रयास निश्चित रूप से प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है।

वंचितों के विकास के लिए निरंतर कार्य जारी रहेगा : अनिरुद्ध देशपांडे

कार्यक्रम की प्रस्तावना करते हुए सिटी कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिरुद्ध देशपांडे ने कहा कि डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन एवं सुझाव के अनुसार ही अमनोरा YES फाउंडेशन ने इस आश्रमशाला के उत्थान के लिए कार्य प्रारंभ किया। देखते ही देखते पारधी-आदिवासी समाज के बच्चे आज प्रगति और आत्मनिर्भरता के आकाश में ऊंची उड़ान भर रहे हैं। यह हमारे लिए अत्यंत गौरव और कृतज्ञता का क्षण है।

उन्होंने कहा कि वंचित समाज के विकास के लिए अमनोरा YES फाउंडेशन शिक्षा, चिकित्सा तथा विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में अनेक उपक्रम संचालित कर समाज परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहा है। भविष्य में भी यह सामाजिक कार्य निरंतर जारी रहेगा।

सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास : डॉ. अशोक उईके

आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने कहा कि पारधी एवं आदिवासी समाज के विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनेक पहल की जा रही हैं।

कामगार मंत्री आकाश फुंडकर ने कहा कि यह आश्रमशाला खामगांव की शान है। यहां वंचित समाज के बच्चों के विकास एवं उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करने के लिए किए जा रहे कार्य निश्चित रूप से प्रशंसनीय हैं।

16 छात्राओं को आर्थिक सहायता

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत के हाथों 16 पारधी-आदिवासी छात्राओं को 10-10 हजार रुपये के चेक प्रदान किए गए। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे आश्रमशाला के पूर्व विद्यार्थियों का भी डॉ. मोहन भागवत के हाथों सम्मान किया गया।

 

कार्यक्रम का संचालन विवेक कुलकर्णी ने किया, जबकि आश्रमशाला के मुख्याध्यापक राठौड़ ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विधान परिषद के सदस्य अंबादास दानवे, चिखली की विधायक श्वेता महाले, जळगांव जामोद के विधायक संजय कुटे सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी एवं मान्यवर उपस्थित थे।

वंचित समाज के बच्चों को शिक्षा, खेल, कौशल और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देने वाला यह उपक्रम सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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