
तमिलनाडु में देशभर से आए मराठी साहित्यकारों का भव्य स्वागत
तंजावुर में आज सजेगा ऐतिहासिक मराठी साहित्य सम्मेलन
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे/चेन्नई, अखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषद के तत्वावधान में दक्षिण भारत का पहला मराठी साहित्य सम्मेलन 23 सितंबर को ऐतिहासिक नगरी तंजावुर में आयोजित होगा। छत्रपति शिवाजी महाराज के भाई व्यंकोजी महाराज के वंशज सरफोजीराजे द्वितीय ने दक्षिण भारत में मराठी साहित्य, संस्कृति, कला, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन्होंने मराठी और तमिल साहित्य एवं संस्कृति के बीच सेतु स्थापित करते हुए तंजावुर को एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया। इसी ऐतिहासिक विरासत के मद्देनजर लगभग साढ़े तीन सौ वर्ष बाद तंजावुर में मराठी साहित्य सम्मेलन का आयोजन हो रहा है।
सम्मेलन में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र सहित पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, दिल्ली, गुजरात, गोवा और आंध्र प्रदेश से सैकड़ों साहित्यकार चेन्नई पहुंचे। तंजावुर संस्थान के युवराज एवं सम्मेलन के निमंत्रक युवराज संभाजीराजे भोसले तथा अखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. शरद गोरे ने चेन्नई रेलवे स्टेशन पर देशभर से पहुंचे साहित्यकारों का पुष्प एवं सम्मान के साथ स्वागत किया।
इस दौरान पंढरपुर से सोलापुर तक पैदल यात्रा कर और वहां से रेलमार्ग से चेन्नई पहुंची पंढरपुर की ग्रंथदिंडी का पूजन कर विशेष स्वागत किया गया। चेन्नई रेलवे स्टेशन पर छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज, छत्रपति व्यंकोजी महाराज और सरफोजीराजे के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद साहित्यकार ग्रंथदिंडी के साथ मराठी भाषा का जयघोष करते हुए महाबलीपुरम मार्ग से विशेष वाहनों द्वारा तंजावुर के लिए रवाना हुए।

सम्मेलन में ग्रंथदिंडी, उद्घाटन समारोह, परिसंवाद, कवि सम्मेलन, साहित्य पुरस्कार और समापन समारोह सहित विभिन्न सत्र होंगे। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य दक्षिण भारत में मराठी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को व्यापक मंच देना तथा मराठी और तमिल भाषा एवं संस्कृति के बीच साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है।
तंजावुर मराठा संस्थान के प्रमुख छत्रपति बाबाराजे भोसले सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे, जबकि पूर्व मंत्री लक्ष्मणराव ढोबळे स्वागताध्यक्ष होंगे। डॉ. शरद गोरे सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। उनके मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन दक्षिण भारत में मराठी साहित्य और संस्कृति के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।



