
इटावा में राजस्व कार्यों की समीक्षा: 5 साल पुराने मुकदमे खत्म करने के निर्देश, धारा 34 के 4280 मामलों पर विशेष फोकस
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा, । जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में राजस्व स्टाफ की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राजस्व वादों के निस्तारण, न्यायालयों में लंबित मुकदमों, धारा 34, 24, 116, 67 और 98 के मामलों, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना तथा आईजीआरएस की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को राजस्व बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबित वादों के निस्तारण के लिए अधिकारी स्वयं गंभीरता से प्रयास करें। जिन अधिकारियों की निस्तारण दर अच्छी है, वे इसे बनाए रखें और जिनकी स्थिति कमजोर है, वे विशेष प्रयास कर सुधार लाएं।
5 साल से पुराने मुकदमे लंबित न रहें
जिलाधिकारी ने धारा 34 के लंबित मामलों को प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उप जिलाधिकारी नियमित रूप से अपने न्यायालय में बैठकर मामलों की सुनवाई करें। पांच वर्ष से अधिक पुराने मुकदमे किसी भी स्थिति में लंबित नहीं रहने चाहिए।
धारा 34 के अविवादित वादों के करीब 4280 अवशेष मामलों में विशेष रूप से कमी लाने के निर्देश दिए गए। एसडीएम और तहसीलदारों को इन मामलों की नियमित समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
धारा 24 और 116 के मामलों पर भी जोर
धारा 24 के मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इनकी शासन स्तर पर भी निगरानी की जा रही है। लंबित मामलों को अनावश्यक रूप से आगे न बढ़ाया जाए। आवश्यकता के अनुसार रोवर का प्रयोग कर पैमाइश संबंधी कार्यों को पारदर्शी और सुगम बनाने के निर्देश दिए गए।
धारा 116 के तहत बंटवारे के मामलों की बढ़ती संख्या पर जिलाधिकारी ने चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को नियमित सुनवाई करते हुए समयबद्ध तरीके से मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए।
धारा 67 के मामलों में दोनों पक्षों के मोबाइल नंबर दर्ज करने के निर्देश
धारा 67 के मामलों को महत्वपूर्ण बताते हुए जिलाधिकारी ने विशेष फोकस करने को कहा। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदारों को नियमित समीक्षा के निर्देश दिए। साथ ही दोनों पक्षकारों के मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज करने को कहा, ताकि संबंधित पक्षों को समय से सूचना मिल सके और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
धारा 98 के लंबित मामलों को भी चिन्हित कर शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि लंबित मामलों का असर जिले की रैंकिंग पर पड़ता है।
IGRS में सिर्फ निस्तारण नहीं, समस्या का वास्तविक समाधान जरूरी
आईजीआरएस की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जिले की रैंकिंग और शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल पोर्टल पर शिकायत को निस्तारित दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण समाधान होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान और मौके पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित न हो, तब तक प्रकरण को पूरी तरह निस्तारित नहीं माना जाए। शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
तहसील और कंप्यूटर कक्ष का निरीक्षण करें एसडीएम
जिलाधिकारी ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्धारित समय पर तहसील में उपस्थित रहकर जनसामान्य की समस्याओं की सुनवाई करने के निर्देश दिए। एसडीएम को तहसील परिसर का नियमित भ्रमण करने के साथ कंप्यूटर कक्ष का भी निरीक्षण करने को कहा गया, ताकि ऑनलाइन राजस्व कार्यों, प्रकरणों की फीडिंग और निस्तारण की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालय में बैठकर समीक्षा न करें, बल्कि तहसील के विभिन्न पटलों और कार्यस्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाएं।
गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ हो राजस्व वादों का निस्तारण
जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व वादों का निस्तारण केवल संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए। सभी अधिकारी अपने न्यायालयों में लंबित वादों की श्रेणीवार सूची तैयार कर प्राथमिकता तय करें और पुराने मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाएं।
उन्होंने कहा कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही शासन की प्राथमिकता है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक संदीप श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर, समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार तथा संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।



