पूणेमहाराष्ट्र

अवयव दान करनेवाले परिवार द्वारा ध्वजारोहण

अवयव दान करनेवाले परिवार द्वारा ध्वजारोहण

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, कठिन परिस्थितियों में अपने दुःख को को एक तरफ रखते हुए अवयव दान के लिए संमती देने वाले अवयव दाता के परिवार के सदस्यों के हाथों नोबल हॉस्पिटल ॲन्ड रिसर्च सेंटर में 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया गया. अपने भाई को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद अवयव दान के लिए संमती देने वाले उनके परिवार में से एक उनके सगे भाई नितीन कामटे के हाथों ध्वजारोहण किया गया. इस पहल का उद्देश्य अवयव दाता के परिवार के महान कार्य के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना और अवयव दान के बारे में जागरूकता पैदा करना था.

 

नितीन कामटे ने कहा, अवयवदान से कई लोगों और उनके परिवारों के जीवन में नई आशा पैदा होती है. अवयवदाता अपने अवयव के माध्यम से दूसरों के जीवन में जीवित रहते हुए उन्हें नवसंजीवनी प्रदान करते हैं. इसलिए हमें अपने द्वारा लिए गए इस निर्णय पर संतोष है. हम अपने गांव में भी अवयवदान जैसे महान कार्य के प्रचार-प्रसार के लिए काम करेंगे.

 

चालीस वर्षीय सचिन कामटे को मेंदू में रक्तस्राव होने के बाद डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया था. उनके परिवार को पहले से ही अवयव दान के बारे में जानकारी थी. डॉ.अबनावे के साथ चर्चा के बाद उनकी पत्नी और सगे भाई ने अवयवदान का निर्णय लिया.

 

सचिन केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले व्यक्ति नहीं थे, बल्कि समाज के लिए भी कुछ करने की उनकी हमेशा कोशिश रहती थी. लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने अपने सगे भाई के साथ मिलकर ‘दुर्गा एग्रो फूड्स’ कंपनी की स्थापना की थी. पिछले लगभग 15 वर्षों से वह अपने भाई के साथ मिलकर कंपनी का काम संभाल रहे थे. उनकी कंपनी में लगभग 50 लोग कार्यरत थे. इसके साथ ही सचिन की अपनी सब्जी की दुकान भी थी, जिसे वे नियमित रूप से संभालते थे. व्यवसाय, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों को वे पूरी मेहनत और लगन से निभाते थे.

 

सचिन का 14 वर्षीय बेटा है. अपने करीबी व्यक्ति को खोने के बेहद दुखद समय में भी उनकी पत्नी और भाई द्वारा लिए गए अवयवदान के निर्णय के कारण दो मूत्रपिंड दान की जा सकीं और इससे दो जरूरतमंद मरीजों को नए जीवन की उम्मीद मिली.

 

सचिन कामटे ने अपने जीवनकाल में कई लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए और मृत्यु के बाद भी उनके अवयव दान से दो लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी. उनका जीवन सफर और उनके परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायी है.

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