
आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन पर NDA के दलित नेताओं का अलग-अलग रुख, चिराग पासवान और अठावले ने क्या कहा?
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान नई दिल्ली
नई दिल्ली/पटना: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर सियासी बहस तेज हो गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी मदद और आरक्षण की पात्रता तय करने में जाति के बजाय आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने की मांग की। इस मुद्दे पर NDA में शामिल दलित नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों चिराग पासवान तथा रामदास अठावले ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों की मांगें व्यवस्थित तरीके से सरकार के सामने रखी जाती हैं, तो सरकार उनसे बातचीत करेगी। उन्होंने आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इससे देश की आबादी के एक बड़े हिस्से में नाराजगी पैदा हो सकती है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर क्या बोले चिराग?
आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि NDA सरकार पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों यानी EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू कर चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि आरक्षण से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सरकार लोगों की बात सुनने और बातचीत के लिए तैयार है।
तेजस्वी यादव के समर्थन पर भी बोले चिराग
पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिराग पासवान से छात्रों के विरोध प्रदर्शन को RJD नेता तेजस्वी यादव के समर्थन को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव का प्रदर्शन का समर्थन करना अच्छी बात है और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर यह उनकी जिम्मेदारी के अनुरूप है।
हालांकि, चिराग पासवान ने यह भी कहा कि बेहतर होता अगर तेजस्वी यादव विधानसभा के कामकाज के दौरान भी सदन में मौजूद रहते और इन मुद्दों को वहां उठाते। उन्होंने कहा कि देर से ही सही, लेकिन विपक्ष के नेता के तौर पर तेजस्वी अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
चिराग पासवान ने कहा कि सरकार का हिस्सा होने के बावजूद उन्होंने एक पुल की तरह काम करने की कोशिश की है, ताकि जनता की आवाज सरकार तक पहुंच सके और कोई भी व्यक्ति अनसुना न रहे।
अठावले बोले- आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता
वहीं केंद्रीय मंत्री और RPI(A) नेता रामदास अठावले ने आरक्षण खत्म करने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है और इसे खत्म करने की मांग असंवैधानिक है।
अठावले ने कहा कि कुछ लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी इसे खत्म करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण को समाप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने SC और ST समुदायों से लेकर EWS तक आरक्षण के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग जरूरतमंद वर्गों को आरक्षण व्यवस्था का लाभ मिल रहा है। इसलिए इसे खत्म करने की मांग का कोई आधार नहीं है।
जाति व्यवस्था को खत्म करने की उठाई मांग
रामदास अठावले ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत पर रोक है, लेकिन ग्रामीण भारत में आज भी जाति आधारित भेदभाव और SC समुदायों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं, उन्हें पहले जाति व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में काम करना चाहिए। अठावले ने कहा कि आरक्षण को लेकर उनका रुख बिल्कुल स्पष्ट है।
बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति को लेकर भी अठावले की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामदास अठावले ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में चार हिंदू और चार बौद्ध सदस्यों के बजाय आठ बौद्ध ट्रस्टियों की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि गया के जिला मजिस्ट्रेट को समिति का पदेन अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
अठावले ने कहा कि बोधगया मंदिर समिति बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 के तहत संचालित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी हिंदू या अन्य धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनका कहना है कि बौद्धों के पूजा स्थल का संचालन बौद्ध समुदाय द्वारा किया जाना चाहिए।
अठावले ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से समय मांगा है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगे।
बौद्ध भिक्षुओं का पांच दिन की भूख हड़ताल का ऐलान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कई बौद्ध भिक्षुओं ने अपनी मांगों को लेकर पटना के गर्दनीबाग इलाके में पांच दिन की भूख हड़ताल करने का ऐलान किया।
फिलहाल आरक्षण के मुद्दे पर जंतर-मंतर का प्रदर्शन और NDA के भीतर से सामने आए अलग-अलग बयानों ने इस बहस को फिर से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


