बार्टी शोधार्थियों का आज से आमरण अनशन शुरू; शैक्षणिक प्रगति रोकने की सरकार की साजिश—राहुल डंबाळे का सीधा आरोप
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (बार्टी) के फेलोशिपधारी अनुसूचित जाति के शोधार्थियों ने अपने न्यायसंगत अधिकारों के लिए आंदोलन तेज कर दिया है। आज से शोधार्थियों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। मुख्य अनशनकारी के रूप में सुरेखा वासनिक और किरण देवकरे आज से अनशन पर बैठी हैं।
शोधार्थियों का आरोप है कि सरकार द्वारा लागू की गई वर्ष 2023 की कठोर और अन्यायपूर्ण शर्तों के कारण अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। विद्यार्थियों ने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग के पास पर्याप्त धन उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर टालमटोल की जा रही है।
आंदोलकारियों के अनुसार, 58 जातियों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या को केवल 100 तक सीमित करना और पीएचडी शिक्षा का इस तरह ‘रेशनिंग’ करना बेहद निंदनीय है।
इस आंदोलन को रिपब्लिकन यूथ फेडरेशन सहित आंबेडकरवादी आंदोलन से जुड़ी विभिन्न संगठनों ने अपना समर्थन दिया है।
आंदोलन के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के नेता राहुल डंबाळे ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग के पास अतिरिक्त धन उपलब्ध होने के बावजूद हजारों करोड़ रुपये अन्य विभागों की योजनाओं में कथित तौर पर स्थानांतरित किए जा रहे हैं।
डंबाळे के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में 9,862 करोड़ रुपये ‘लाडकी बहिण’ और ‘मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन’ योजनाओं की ओर स्थानांतरित किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास धन की कमी नहीं है, फिर भी गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को फेलोशिप से वंचित करना अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा डालने की पूर्व नियोजित साजिश है।
राहुल डंबाळे ने राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट से इस मामले में तत्काल व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर विद्यार्थियों की लंबित मांगों का समाधान करने की मांग की।
इससे पहले आंबेडकराइट स्टूडेंट एसोसिएशन के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने समाज कल्याण आयुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। इस दौरान शासनादेश की सार्वजनिक रूप से होली जलाकर विरोध दर्ज कराया गया था।
आंदोलन के पहले चरण में बार्टी की रजिस्ट्रार सुचित्रा शिंदे ने आंदोलनकारी विद्यार्थियों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की थी, लेकिन बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
प्रशासन और सामाजिक न्याय विभाग की कथित उदासीनता से नाराज विद्यार्थियों ने आखिरकार आज से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें उनकी फेलोशिप नहीं मिलती और वर्ष 2023 का कथित अन्यायपूर्ण शासन निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।



