
एक-दो नहीं, कई तस्वीरों में पुलिसकर्मी जुलूस के साथ!
सीतामढ़ी में ड्यूटी और निष्पक्षता पर सवाल, मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री, डीआईजी, जिलाधिकारी और एसपी से जवाब या जांच की मांग
विशाल समाचार | सीतामढ़ी, बिहार
दिनांक: दिन बुधवार 26 अगस्त 2026
सीतामढ़ी। धार्मिक जुलूसों के दौरान पुलिस की तैनाती कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होती है। लेकिन सीतामढ़ी से सामने आई कई तस्वीरों ने पुलिस की ड्यूटी और निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशाल समाचार के पास उपलब्ध तस्वीरों में अलग-अलग मौकों पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी धार्मिक जुलूस में शामिल लोगों के साथ सामूहिक तस्वीरों में दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में धार्मिक झंडे, जुलूस में शामिल लोग और पुलिसकर्मी एक ही फ्रेम में नजर आ रहे हैं।
एक-दो तस्वीर होती तो इसे सामान्य माना जा सकता था, लेकिन यहां तस्वीरों की संख्या ही सवाल खड़ा कर रही है। उपलब्ध कई तस्वीरों में बार-बार पुलिसकर्मी जुलूस में शामिल लोगों के साथ फोटो खिंचवाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ड्यूटी के दौरान इस तरह सामूहिक तस्वीरों में शामिल होना पुलिसकर्मियों के आधिकारिक आचरण का हिस्सा है?
सवाल तस्वीर का नहीं, निष्पक्षता की धारणा का

धार्मिक जुलूस में पुलिस की मौजूदगी पर कोई सवाल नहीं है। किसी भी धर्म के आयोजन में सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है। सवाल केवल इतना है कि वर्दीधारी पुलिसकर्मियों का लगातार धार्मिक जुलूस में शामिल लोगों के साथ सामूहिक तस्वीरों में दिखाई देना आम लोगों के बीच पुलिस की निष्पक्षता को लेकर क्या संदेश देता है।
सिर्फ तस्वीर के आधार पर किसी पुलिसकर्मी की नीयत या किसी समुदाय के समर्थन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन जब ऐसी तस्वीरें बार-बार सामने आएं और पुलिस के आधिकारिक मीडिया तंत्र से प्रसारित हों, तो विभाग से स्पष्टीकरण और जरूरत पड़ने पर जांच की मांग जरूर बनती है।
पुलिस अधीक्षक मीडिया सेल से तस्वीरें

जानकारी के अनुसार ये तस्वीरें सीतामढ़ी पुलिस अधीक्षक के मीडिया सेल के ग्रुप में नियमित रूप से भेजी गई खबरों के साथ साझा की गई हैं। यदि तस्वीरें आधिकारिक पुलिस मीडिया तंत्र के माध्यम से जारी हुई हैं, तो सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या विभाग ने इन तस्वीरों को उचित माना है?
क्या ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार सामूहिक फोटो खिंचवाने को लेकर कोई विभागीय दिशा-निर्देश हैं? यदि हैं, तो क्या उनका पालन हुआ? और यदि नहीं, तो ऐसी तस्वीरें आधिकारिक माध्यम से सामने क्यों आईं?
मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री से सवाल

बिहार के मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी से सवाल है कि क्या सरकार इस मामले का संज्ञान लेगी? क्या यह जांच कराई जाएगी कि तस्वीरों में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मी उस समय किस ड्यूटी पर थे और तस्वीरें किस परिस्थिति में ली गईं?
डीआईजी, जिलाधिकारी और एसपी भी दें जवाब
संबंधित डीआईजी, सीतामढ़ी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी सवाल है कि क्या इन तस्वीरों की समीक्षा कराई जाएगी? क्या संबंधित पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा? यदि जांच में कोई नियम-विरुद्ध आचरण सामने आता है, तो क्या कार्रवाई की जाएगी?

और यदि तस्वीरों में सब कुछ विभागीय नियमों के अनुरूप है, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ड्यूटी के दौरान इस प्रकार की तस्वीरों को लेकर विभाग का प्रोटोकॉल क्या है।
नियम सभी के लिए समान हों

यह मामला किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। कल किसी दूसरे धर्म के जुलूस में भी यदि पुलिसकर्मी इसी तरह सामूहिक तस्वीरों में दिखाई देंगे, तो सवाल वही रहेगा। पुलिस किसी धर्म, जाति या समुदाय की नहीं होती—पुलिस कानून और संविधान की होती है।
इसलिए धार्मिक आयोजनों को लेकर नियम भी सभी के लिए समान और निष्पक्ष होने चाहिए।
अब देखना है—जवाब या जांच?
तस्वीरें सामने हैं। तस्वीरें एक-दो नहीं, कई हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री, डीआईजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस मामले पर जवाब देंगे या तस्वीरों की निष्पक्ष जांच कराएंगे?
अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है तो स्थिति स्पष्ट की जाए। और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो।

विशाल समाचार न किसी राजनीतिक दल के पक्ष में है, न विपक्ष में। न किसी धर्म के खिलाफ और न किसी समुदाय के खिलाफ।
सवाल सिर्फ इतना है—वर्दी की मर्यादा और पुलिस की निष्पक्षता कायम रहनी चाहिए।
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