
14 साल बाद फिर शुरू हुई शिक्षक पुरस्कार की परंपरा, 42 शिक्षक सम्मानित
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय उन्हें आत्ममंथन और तार्किक सोच के लिए प्रेरित करने वाली शिक्षा की जरूरत है। शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों और अच्छे संस्कारों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। यह बात राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने पुणे विश्वविद्यालय के संत ज्ञानेश्वर सभागार में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में कही।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से दिया जाने वाला डॉ. जे.पी. नाईक आदर्श राज्य शिक्षक पुरस्कार 14 वर्ष बाद फिर शुरू किया गया। इस वर्ष राज्य के 42 शिक्षकों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया। मंत्री पाटील ने कहा कि पुरस्कारों के लिए किसी राजनीतिक व्यक्ति की सिफारिश पर विचार नहीं किया गया, बल्कि शिक्षकों का चयन पूरी तरह गुणवत्ता और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर किया गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक नेतृत्व भी करते हैं। बदलते समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। विद्यार्थियों के मन में चल रही समस्याओं और भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं को समझकर शिक्षकों को उचित मार्गदर्शन देना चाहिए।
पाटील ने कहा कि महाराष्ट्र की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी को परिचित कराने की आवश्यकता है। परंपराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक और तार्किक पहलुओं को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर पाटील ने अगले वर्ष से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से उत्कृष्ट सामाजिक सेवा कार्य पुरस्कार तथा आदर्श शिक्षकेतर कर्मचारी पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकेतर कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
उच्च शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर ने बताया कि वर्ष 2012 में बंद हुई शिक्षक पुरस्कार की परंपरा 14 साल बाद फिर शुरू हुई है। पुरस्कार के लिए शिक्षकों का कई स्तरों पर परीक्षण किया गया और पारदर्शी प्रक्रिया के बाद 42 शिक्षकों का चयन किया गया।
कार्यक्रम में पुणे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. सुरेश गोसावी, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी, पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी और विश्वविद्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।


