
कोर्ट परिसर में ही लोग सुरक्षित नहीं तो आम नागरिक कहां जाएं? पटियाला हाउस कोर्ट की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान नई दिल्ली
नई दिल्ली। न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाले लोग यदि कोर्ट परिसर के बाहर ही खुद को असुरक्षित महसूस करें तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पटियाला हाउस कोर्ट में स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े मामले की सुनवाई के बीच सामने आई कथित मारपीट की घटना ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 7 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसी मामले की सुनवाई और उससे जुड़े घटनाक्रम के बीच कोर्ट परिसर के बाहर समर्थकों के साथ कथित विवाद और मारपीट की बात सामने आई। घटना को लेकर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और उनकी जान को खतरा है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, हालांकि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लेकर खड़ा हुआ है। अदालत वह स्थान है जहां आम नागरिक, वकील, पक्षकार और उनके परिजन न्याय की प्रक्रिया के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि कोर्ट के आसपास ही विवाद और कथित हिंसा की स्थिति पैदा होती है तो सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है, यह सवाल दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन से पूछा जाना जरूरी है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके मामले को लेकर पहले से ही दिल्ली में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है।
विशाल समाचार ने इससे पहले भी कोर्ट परिसरों की सुरक्षा और वहां आने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया है। ऐसे में पटियाला हाउस कोर्ट की ताजा घटना ने एक बार फिर वही सवाल सामने ला दिया है—जब कोर्ट परिसर में ही लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक आखिर अपनी सुरक्षा के लिए किस पर भरोसा करे?
क्या दिल्ली पुलिस घटना की निष्पक्ष जांच कराएगी? क्या कोर्ट परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी? और यदि किसी पक्ष की ओर से कानून हाथ में लेने की कोशिश हुई है, तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
सवाल गंभीर है और जवाब दिल्ली पुलिस तथा प्रशासन को देना होगा।


