
अदालत के दरवाजे पर डर क्यों?
कोर्ट परिसर सुरक्षित नहीं तो आम नागरिक कहां जाए?
अदालत वह जगह है जहां आम आदमी अपनी आखिरी उम्मीद लेकर पहुंचता है। उसे भरोसा होता है कि यहां कानून का राज है, व्यवस्था है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य की है। लेकिन पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर सामने आया कथित विवाद और मारपीट इस भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के बाहर समर्थकों के साथ कथित मारपीट और विवाद की खबरें सामने आईं। पीड़ित पक्ष ने अपनी जान को खतरा होने की बात कही है। घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, घटना में कौन शामिल था और पूरी घटना का वास्तविक क्रम क्या था, इसकी आधिकारिक और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मुद्दा केवल एक व्यक्ति, एक संगठन या दो पक्षों के बीच हुए विवाद का नहीं है। मुद्दा अदालत की सुरक्षा और कानून के प्रति आम नागरिक के भरोसे का है।
यदि अदालत में आने वाला व्यक्ति ही परिसर के बाहर भय महसूस करे, यदि पक्षकार और उनके समर्थक कथित तौर पर आपस में भिड़ जाएं और यदि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तैनात सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठें, तो जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए।
दिल्ली पुलिस से सीधा सवाल है—आखिर कोर्ट परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
किसी पर आरोप लगना उसे दोषी साबित नहीं करता। लेकिन आरोप लगने के बाद निष्पक्ष जांच न होना व्यवस्था की कमजोरी जरूर बन सकता है। पुलिस को बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के घटना की जांच करनी चाहिए। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध वीडियो की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
विशाल समाचार पहले भी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाता रहा है। हर घटना के बाद कुछ दिनों तक सुरक्षा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट परिसर में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि वहां कानून से बड़ा कोई व्यक्ति, भीड़ या संगठन दिखाई ही न दे।
अदालत के बाहर अगर भीड़ कानून अपने हाथ में लेने लगे तो यह केवल सुरक्षा की विफलता नहीं, बल्कि कानून के शासन के लिए चेतावनी है।
आज सवाल स्वतंत्र भारद्वाज का नहीं है। सवाल किसी समर्थक या विरोधी पक्ष का भी नहीं है।
आज सवाल उस आम नागरिक का है जो न्याय मांगने अदालत पहुंचता है।
अगर न्याय के मंदिर के दरवाजे पर ही उसे डर लगेगा, तो वह सुरक्षा और कानून पर भरोसा कैसे करेगा?
जवाब चाहिए। कार्रवाई चाहिए। और सबसे जरूरी—अदालत परिसर में कानून का राज हर हाल में दिखाई देना चाहिए।


