
मुख्यमंत्री के राष्ट्रीय पोषण माह शुभारंभ कार्यक्रम का कलेक्ट्रेट में हुआ सजीव प्रसारण।
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान औरैया उत्तर प्रदेश
औरैया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वाराणसी (काशी) में आयोजित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (09 सितम्बर से 08 अक्टूबर 2026 तक) के शुभारंभ कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में जिलाधिकारी बृजेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की उपस्थिति में देखा एवं सुना गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, संतुलित आहार, स्वच्छता तथा जनभागीदारी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पोषण माह के अंतर्गत विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण का जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों एवं छह वर्ष तक के बच्चों के बेहतर पोषण के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करें। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से घर-घर जाकर पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने, नियमित वजन एवं ऊंचाई मापन, पोषण ट्रैकर ऐप के प्रभावी उपयोग तथा कुपोषित बच्चों की समयबद्ध पहचान कर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान आयोजित होने वाली रैलियां, गोष्ठियां, पोषण चौपाल, अन्नप्राशन, गोदभराई तथा स्वच्छता एवं पोषण संबंधी गतिविधियों में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 09 सितम्बर से 08 अक्टूबर 2026 तक जनपद में व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा। इस अवधि में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण जागरूकता कार्यक्रम, गोदभराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम, पोषण चौपाल, किशोरी बालिकाओं के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण सत्र, एनीमिया जागरूकता गतिविधियां, रसोई बागवानी को बढ़ावा देने के कार्यक्रम, स्वच्छता एवं संतुलित आहार पर जनजागरूकता अभियान तथा कुपोषित बच्चों की पहचान एवं परामर्श संबंधी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से कुपोषण को कम करना तथा प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पोषण सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।



